UPSC Result: पानीपत की मधुमिता ने हासिल की 86 वीं रैंक, बोलीं- फेसबुक, वाट्सएप, यू-ट्यूब से बनाई दूरी तो मिली सफलता
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UPSC Result: पानीपत की मधुमिता ने हासिल की 86 वीं रैंक, बोलीं- फेसबुक, वाट्सएप, यू-ट्यूब से बनाई दूरी तो मिली सफलता
पानीपत की मधुमिता ने सिविल सेवा में लहराया परचम, परिवार के साथ मनाई ख़ुशी

मधुमिता बताती हैं कि ये उनका तीसरा प्रयास था. यूपीएससी (UPSC) के पहले अटेंप्ट में मेन्स एग्जाम क्लियर हुआ था, लेकिन दूसरे में तो उसमें भी रह गई थीं लेकिन पीछे नहीं हटीं. फिर तैयारी की स्ट्रैटजी बदली और तीसरे अटेंप्ट में जब तक मेन्स का एग्जाम नहीं हुआ था, तब तक फेसबुक, वाट्सएप, यू-ट्यूब सब डिएक्टिवेट कर दिया.

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पानीपत. समालखा निवासी मधुमिता (Madhumita) सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Examinations) में 86 वीं रैंक हासिल कर युवाओं के लिए मिसाल बन गई हैं. अपने तीसरे प्रयास में सफलता का परचम लहराने वाली मधुमिता की कहानी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए काफी प्रेरणादायी है. वो बताती हैं कि उनके घर-परिवार ने उनका बहुत साथ दिया यहां तक कि घर में शादी-ब्याह की बात करना भी मना था. उनके माता-पिता ने रिश्तेदारों से कह दिया था कि जब तक बेटी का चयन नहीं हो जाता उसकी पढ़ाई में किसी तरह का व्यवधान नहीं आने देंगे.

फेसबुक, वाट्सएप, यू-ट्यूब से बनाई दूरी
सिविल सर्विसेज (Civil Services) में चयनित हो चुकी मधुमिता कहती हैं कि मेरे घर वालों की सोच अच्छी थी तभी, उन्होंने पहले ही कह दिया था कि 'जब तक छोरी की नौकरी नहीं लागेगी, तब तक शादी-ब्याह की कोई बात नहीं होवेगी'. घर वालों ने इस बारे में किसी तरह की टेंशन नहीं दी कि लड़की पढ़-लिख ली है, अब इसकी शादी कर दो. मधुमिता बताती हैं कि ये उनका तीसरा प्रयास था. यूपीएससी के पहले अटेंप्ट में मेन्स एग्जाम क्लियर हुआ था, लेकिन दूसरे में तो उसमें भी रह गई थीं लेकिन पीछे नहीं हटीं. फिर तैयारी की स्ट्रैटजी बदली और तीसरे अटेंप्ट में जब तक मेन्स का एग्जाम नहीं हुआ था, तब तक फेसबुक (Facebook), वाट्सएप (Whats-app), यू-ट्यूब (Youtube) सब डिएक्टिवेट कर दिया. वो कहतीं हैं बाकी सब चीजें सैकेंडरी थी. उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ तैयारी था.

मधुमिता बताती हैं कि पहले दो अटेंप्ट में सेल्फ स्टडी की थी. उसके बाद टेस्ट क्लास ज्वाइन की. इसके लिए वह दिल्ली गईं. वो बताती हैं कि वहां टेस्ट क्लास में हर 15 दिन के अंतराल पर सिलेबस दिया जाता था और फिर उसका टेस्ट होता था. इस टेस्ट क्लास में उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट हुआ. मधुमिता हर दिन करीब 8 घंटे पढ़ाई करती थी. मधुमिता कहती हैं कि पहले दो अटेंप्ट क्लियर नहीं हुए तो मैंने अपनी कमजोरी पकड़ी. मैं सेल्फ स्टडी तो बहुत करती थी, लेकिन जब पेपर देने बैठती थी तो उतना लिख नहीं पाती थी. इसके बाद टेस्ट क्लास शुरू की तो सबसे पहले ये कॉन्फिडेंस बूस्ट किया कि निर्धारित समय में पेपर पूरा कैसे करना है. वो मुस्कुराते हुए कहती हैं 'इसी का नतीजा है कि परीक्षा क्लियर हुई'.



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10वीं से ग्रेजुएशन तक टॉपर रही हैं मधुमिता
मधुमिता ने 10th बोर्ड समालखा के महाराणा प्रताप पब्लिक स्कूल से 2010 में दिया था. वह तब स्कूल में टॉपर थी. इसके बाद 2012 में 12th बोर्ड में स्कूल में उनका दूसरा स्थान था. फिर पाइट समालखा से बीबीए किया उसमें यूनिवर्सिटी में पहली पोजीशन आई. उन्होंने इग्नू से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए भी किया है. मधुमिता के पिता महावीर सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में ऑक्शन रिकॉर्डर हैं. उनकी माता दर्शना देवी गृहिणी हैं. दो भाई सतेंद्र और राघवेंद्र हैं. वो बताती हैं कि उनके माता-पिता ने हर तरह से उनको सपोर्ट किया उनकी सफलता का श्रेय भी उन्हीं को जाता है.
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