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स्‍कूलों में पढ़ाई शुरू, आर्थिक रूप से पिछड़े बच्‍चों का नहीं हुआ एडमिशन, पेरेंट्स ने की ये अपील

हरियाणा में स्‍कूलों की पढ़ाई शुरू हो गई है लेकिन गरीब बच्‍चों का दाखिला नहीं हुआ है.

हरियाणा में स्‍कूलों की पढ़ाई शुरू हो गई है लेकिन गरीब बच्‍चों का दाखिला नहीं हुआ है.

अभिभावकों का आरोप है क‍ि एक तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री रोजाना बयान दे रहे हैं कि प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से क्लास फर्स्ट तक शिक्षा अधिकार कानून के तहत व क्लास 2 से 12 तक 134ए के तहत गरीब बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में कराया जाएगा जबकि दूसरी तरफ सभी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया पूरी होकर पढाई शुरू हो गई है.

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    नई दिल्‍ली. हरियाणा सरकार की ओर से आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के दाखिले के लिए पुराना नियम फिर से लागू करने के बावजूद गरीब बच्‍चों का एडमिशन नहीं हो पा रहा है. जिसकी अभिभावक शिकायत कर रहे हैं. हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने आरोप लगाते हुए कहा कि 1 अप्रैल से नए शिक्षा सत्र की पढ़ाई शुरू हो गई है. सीबीएसई व हरियाणा बोर्ड के सभी प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से बारहवीं तक जितने भी नए दाखिले होने हैं वह हो चके हैं. कोई सीट खाली नहीं है. उसके बावजूद शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूल संचालकों से इस साल प्रत्येक क्लास में किए जाने वाले नए दाखिलों की सीटों का ब्यौरा मांग रहा है.

    हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां गत वर्ष की तरह ही इस साल भी गरीब परिवारों के बच्चों के साथ अन्याय कर रही हैं. मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा और प्रदेश संरक्षक सुभाष लांबा ने कहा है कि एक ओर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री रोजाना बयान दे रहे हैं कि प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से क्लास फर्स्ट तक शिक्षा अधिकार कानून के तहत व क्लास 2 से 12 तक 134ए के तहत गरीब बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में कराया जाएगा जबकि दूसरी तरफ सभी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया पूरी होकर पढाई शुरू हो गई है. ऐसे में सरकार बताए कि वह गरीब बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में किस प्रकार कराएगी.

    मंच ने कहा कि सरकार पूरी तरह से सभी नियम कानूनों का उल्लंघन करके शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहे स्कूल संचालकों के हित में कार्य कर रही है. सरकार को समझना व जानना चाहिए कि अभिभावक भी वोट बैंक हैं. सरकार को गरीब मध्यम अभिभावकों के हित में भी कार्य करना चाहिए. आइपा के जिला अध्यक्ष बी एस विरदी एडवोकेट और मंच की महिला सयोंजक पूनम भाटिया ने कहा कि इस साल सभी स्कूल संचालकों ने ट्यूशन फीस में मनमाने तरीके से 20 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की है इसके अलावा एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फंड्स व अन्य कई फंडों में फीस ली जा रही है. सरकार को इसकी पूरी जानकारी है पर वह दोषी स्कूलों के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं कर रही है.

    मंच ने सभी अभिभावकों से कहा है कि वे सरकार द्वारा इस साल भी गरीब बच्चों का निशुल्क दाखिला ना कराने व मनमानी फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई ना करने पर अपने क्षेत्र के विधायक से मिलकर अपना विरोध प्रकट करें और विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम अपना विरोध पत्र भिजवायें.

    Tags: Government School, Parents, Private schools

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