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गैंगरेप पीड़ित छात्रा को पेपर ना देने का मामला: 3 प्रोफेसर पाए गए दोषी, तीनों को किया सस्पेंड

Pawan Kumar | News18 Haryana
Updated: November 5, 2019, 4:09 PM IST
गैंगरेप पीड़ित छात्रा को पेपर ना देने का मामला: 3 प्रोफेसर पाए गए दोषी, तीनों को किया सस्पेंड
तीनों प्रोफेसर ने नहीं दी थी छात्रों को परीक्षा देने की इजाजत

जानकारी के मुताबिक 30 जुलाई को आई सीटीएम की जांच रिपोर्ट में 3 प्रोफेसर्स को दोषी पाया गया था. लेकिन उनपर कार्रवाही नहीं की गई थी और जैसे ही ये मामला फिर मिडिया में आया तो 3 प्रोफेसर्स की सस्पेंड कर दिया गया है.

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रेवाड़ी. बहुचर्चित गैंगरेप केस (Gang Rape Case) में नारनौल फास्टट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में केस चल रहा है और पीड़ित न्याय के इन्तजार में है. वहीँ दूसरी और पीड़ित को कई कठनाईयों का समाना करना पड़ रहा है. ऐसा ही एक वाक्या 18 मई 2019 को हुआ जब नाहड़ कॉलेज में कुछ प्रोफेसर्स ने रेप पीड़ित छात्रा को परीक्षा नहीं देने दी और उल्टा अपमानित किया. इसकी शिकायत पीड़ित ने जिला उपायुक्त से की थी, लेकिन सीटीएम साहब अभी भी गोलमोल जवाब दे रहें है जबकि जांच कमेटी का अध्यक्ष सीटीएम को बनाया गया था.

जानकारी के मुताबिक 30 जुलाई को आई सीटीएम की जांच रिपोर्ट में  3 प्रोफेसर्स को दोषी पाया गया था. लेकिन उनपर कार्रवाही नहीं की गई थी और जैसे ही ये मामला फिर मिडिया में आया तो 3 प्रोफेसर्स की सस्पेंड कर दिया गया है.

मामला कोर्ट में विचारधीन

बता दे की 12 सितंबर को कोसली थाना क्षेत्र की एक 19 वर्षीय छात्रा से खेत में बने कमरे में गैंगरेप किया गया था. उस वक्त भी पुलिस ने समय पर कार्रवाही नहीं की थी और मामला मीडिया में आया था केस दर्ज कर कार्रवाही की गई थी. जिसके बाद से पीड़ित को पुलिस ने सुरक्षा मुहिया कराई हुई है और नारनौल फास्टट्रेक कोर्ट में मामला विचारधीन है.

परीक्षा देने गई थी पीड़ित

इस बीच पीड़ित छात्रा 18 मई 2019 को नाहड़ गवर्मेंट कॉलेज में बीएससी फस्ट ईयर के सेकेंड समेस्टर की परीक्षा देने की गई थी. जहां प्रोफेसर सुमन यादव, जगत सिंह और सहायक प्रोफेसर अजित सिंह ने ये कहते हुए परीक्षा नहीं देने दी की पीड़ित के साथ पुलिस सुरक्षा परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं जायेगी. जबकि पीड़ित और उसके परिवार ने कहा की पहली परीक्षा भी उन्होंने पुलिस सुरक्षा के बीच दी है.

नहीं देने दी परीक्षा
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लेकिन मौके पर मौजूद तीनों प्रोफेसर ने पीड़ित को परीक्षा नहीं देने दी. इसकी शिकायत पीड़ित ने जिला उपायुक्त को की थी और जिला उपायुक्त ने सीटीएम की अध्यक्षता में डीएसपी, महिला थाना इंचार्ज, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और प्रचार्या डाइट हुसैनपुर की एक कमेटी बनाई थी. जिस कमेटी की जाँच 30 जुलाई को सीटीएम ने जिला उपायुक्त को सौंप दी थी लेकिन उसपर कोई कार्रवाही नहीं की गई.

मीडिया में उठा मामला तो लिया फैसला

ये मामला मीडिया ने उठाया और तीनों प्रोफेसर्स को सस्पेंड किया गया. पहले तो कैमरें पर कोई प्रशासनिक अधिकारी बोलने को तैयार नहीं था. लेकिन बाद में सीटीएम विकास यादव ने कहा की शिकायतकर्ता की शिकायत पर जांच करके उन्होंने रिपोर्ट आगे भेज दी थी. जिसके बाद पीड़ित छात्रा को अपमानित करने के सवाल पर सीटीएम ने कहा की उन्हें  नहीं पता जाँच रिपोर्ट में एक्जेक्ट क्या है. वही प्रोफेसर्स को सस्पेंड करने की जानकारी ना होने की बात कह रहें है.

तीनों को किया सस्पेंड

फिलहाल देरी से ही सही दोषी प्रोफेसर्स को सस्पेंड किया गया है. लेकिन रेप पीड़ित छात्रा को अपमानित करने का जांच रिपोर्ट में ना कोई जिक्र है और ना उसपर कोई कार्रवाई की गई है. वहीं पीड़ित छात्रा का पेपर ना देने दिए जाने पर एक साल जो ख़राब हुआ है उसकी पूर्ति कराने की भी अभी केवल बातें की जा रही है.

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First published: November 5, 2019, 3:58 PM IST
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