हरियाणा में गेहूं की एलर्जी की चपेट में तकरीबन 2 लाख लोग, ये हैं इस बीमारी के लक्षण

अगर इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया जाए तो मरीज ब्लड कैंसर और आंत के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकता है.

Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: July 16, 2019, 6:03 PM IST
हरियाणा में गेहूं की एलर्जी की चपेट में तकरीबन 2 लाख लोग, ये हैं इस बीमारी के लक्षण
समय पर इलाज न किया जाए तो हो सकता है कैंसर
Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: July 16, 2019, 6:03 PM IST
गेहूं हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके पौष्टिक तत्व तन और मन को ऊर्जा देते हैं. क्योंकि यह कैल्शियम, आयरन, विटामिन और फाइबर का बड़ा स्त्रोत होता है. लेकिन हमारे प्रदेश में सीलिएक डिजीज यानि गेहूं की एलर्जी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो कि ग्लूटेन प्रोटीन की वजह से होती है. हरियाणा में इन मरीजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है. एक स्टडी के मुताबिक, पूरे देश में सबसे ज्यादा प्रभावित अगर कोई राज्य है, तो वह हरियाणा है, जहां पर तकरीबन 2 लाख के आसपास मरीज हो सकते हैं.

प्रदेश के गेहूं में ग्लूटेन प्रोटीन की मात्रा की होनी चाहिए जांच
दरअसल गेहूं में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन का किसी व्यक्ति के शरीर में पाचन नहीं होने से यह समस्या पैदा होती है. इसमें मरीज की छोटी आंत के अन्दर की परत नष्ट होने लगती है, जिससे मरीज को गेहूं की एलर्जी का सामना करना पडता है. प्रभावित व्यक्ति में कई लक्षण दिखाई पड़ते हैं. सबसे बडा लक्षण तो ये कि मरीज की ग्रोथ रूक जाती है. इसके अलावा दस्त, कब्ज, पेट फूलना, खून की कमी, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, याददाश्त कमजोर होना, हड्डियों में दर्द आदि होते हैं.

समय पर इलाज न किया जाए तो हो सकता है कैंसर

अगर इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया जाए तो मरीज ब्लड कैंसर और आंत के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकता है. महिलाओं में बांझपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इंडियन काऊंसिल ऑफ मैडीकल रिसर्च की एक ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि सीलिएक डिजीज के ज्यादातर मरीज उत्तरी भारत में हैं और उनमें भी सबसे ज्यादा मरीज हरियाणा में हैं, जिनकी संख्या करीब 2 लाख तक हो सकती है.

उत्तर भारत में ये बीमारी ज्यादा
हालांकि दक्षिण भारत में ऐसे मरीजों की संख्या न के बराबर है. दरअसल उत्तरी भारत जैसे यूपी, हरियाणा, पंजाब आदि प्रदेशों में खाने में गेहूं का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है, जिस कारण यह बीमारी इस प्रदेशों में ज्यादा है. रोहतक पीजीआई में हर रोज एक-दो नया मरीज सीलिएक डिजीज से पीड़ित मिल जाता है, जिसे खुद भी नहीं पता होता कि उसे यह बीमारी भी है.
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क्या है डॉक्टरों का कहना
पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीन मल्होत्रा बताते हैं कि हरियाणा में ऐसे मामले काफी अरसे से हैं, लेकिन पहले इनके लक्षण सामने नहीं आ पाते थे और मरीज को बीमारी का ही नहीं पता चल पाता था. लेकिन फिलहाल स्थिति काफी डरावनी है, प्रदेश की 0.8 फीसदी जनसंख्या इस बीमारी की चपेट में है, जोकि तकरीबन 2 लाख के आसपास बनती है. बीमारी का इलाज सिर्फ एक ही है और वह है गेहूं का उपभोग बंद करना. अगर हरियाणा में मरीजों की संख्या ज्यादा है तो प्रदेश के गेहूं की भी लैब टैस्टिंग होनी चाहिए कि कहीं हरियाणा के गेहूं में ही तो ग्लूटेन प्रोटीन की मात्रा ज्यादा नहीं है. बीमारी का इलाज सिर्फ परहेज है, लेकिन जिस तरह से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उससे हालात चिंताजनक हो सकते हैं.

वहीं, इस बीमारी से पीड़ित कुछ मरीज ऐसे भी मिले, जिनको काफी लम्बे अरसे बाद पता चला कि उन्हें गेहूं की एलर्जी है. शरीर में खून की कमी होने से ग्रोथ रूक जाती है. फिलहाल ये मरीज गेहूं और गेहूं से बने पदार्थों का सेवन बिल्कुल बंद कर चुके हैं और इनके शरीर में बदलाव भी आना शुरू हो गया. इसलिए इस बीमारी के प्रति लोगों को सचेत रहना चाहिए और अगर कोई लक्षण नजर आते हैं तो जांच जरूर करानी चाहिए.

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First published: July 16, 2019, 5:21 PM IST
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