मिलिये, रोहतक के युवक से जिस पर किया गया कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल
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मिलिये, रोहतक के युवक से जिस पर किया गया कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल
युवक ने न्यूज 18 से बातचीत कर बताई ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने की वजह

ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने वाले युवक ने बताया कि पूरी दुनिया कोरोना (Coronavirus) से जूझ रही है. सभी इस उम्मीद में हैं कि जल्द से जल्द इस कोराना महामारी (Corona Epidemic) की दवा बने. कोवैक्सीन (Co-vaccine) के क्लीनिकल परीक्षण के लिए मैंने स्वीकृति देश सेवा समझ कर दी है.

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रोहतक. अभी तक कोरोना वायरस (Coronavirus) की दवा नहीं बनी है, लेकिन दुनियाभर के देश कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं. कई देशों में तो ह्यूमन ट्रायल (Human Trial) भी शुरू हो चुका है. भारत में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है. जानवरों पर सफल परीक्षण के बाद अब इंसानों पर कोवैक्सीन का परीक्षण शुरू हो चुका है. रोहतक पीजीआई में भी क्लिनिकल ट्रायल (Clinical Trial) चल रहा है और जिस शख्स ने सबसे पहले खुद पर क्लीनिकल ट्रायल की स्वीकृति दी उन्‍होंने सबसे पहले न्यूज़-18 पर अपने अनुभव साझा किए.

यह शख्स रोहतक के ही रहने वाले हैं, लेकिन मेडिकल एथिकल कमेटी की गाइडलाइंस के मुताबिक News 18 इसकी पहचान उजागर नहीं कर सकता. उन्‍होंने बताया कि जिस तरह से सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक की चिंता नहीं करते, उसी तरह मैंने भी देश के लिए अपना योगदान दिया. पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही है, सभी इस उम्मीद में है कि जल्द से जल्द इस कोराना महामारी की दवा बने. कोवैक्सीन के क्लीनिकल परीक्षण के लिए मैंने स्वीकृति देश सेवा समझ कर ही दी है.

वैक्‍सीन बनाने में देश सफल रहा तो गर्व होगा
उन्‍होंने आगे कहा, 'मुझे गर्व होगा अगर हमारा देश इस वैक्सीन को तैयार करने में सफल होगा. 17 जुलाई को मुझे कोवैक्सिन की पहली डोज दी गई थी और अब मुझे इंतजार 31 जुलाई का है, जब दूसरे चरण की डोज दी जाएगी.' युवक ने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल से पहले उनके स्वास्थ्य की जांच की गई थी. सभी तरह के परीक्षण किए गए थे कि किसी तरह की मुझे कोई बीमारी तो नहीं.
लोगों से की अपील


इस युवक ने बताया कि मेडिकल परीक्षण के बाद डॉक्टर्स की ऑब्जरवेशन में मुझे रखा गया और लगातार एक सप्ताह तक हर रोज तीन-चार बार मेरे स्वास्थ्य की जानकारी ली गई. मुझे किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आई और मैं लोगों से भी अपील करना चाहूंगा कि वह भी क्लिनिकल ट्रायल में शामिल होकर इस देश सेवा का मौका हासिल करें.

27 बार कर चुके हैं रक्तदान
युवक का कहना है कि वह पहले भी रक्तदान करके लोगों की मदद कर चुके हैं. अभी तक 27 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं. परिवार के लोग उन्हें पूरा सहयोग करते हैं. उन्‍हें अपने देश के डॉक्टर्स पर भरोसा है कि वह जल्द ही कोरोना वायरस पर काबू पा लेंगे और उम्मीद करता हूं कि कोवैक्सीन का परीक्षण सफल होगा.
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