रोहतक में भी होगा को-वैक्सीन का ह्यूमन ट्रॉयल, देश के 13 संस्थानों में PGI भी शामिल
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रोहतक में भी होगा को-वैक्सीन का ह्यूमन ट्रॉयल, देश के 13 संस्थानों में PGI भी शामिल
दुनिया में कई कोविड वैक्सीनों का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है.

हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी ओपी कालरा ने बताया की पीजीआई कोवैक्सीन (Co-vaccine) का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने जा रहा है. वैक्सीन को मनुष्य पर इस्तेमाल करने से पहले उस व्यक्ति की अनुमति (Permission) ली जाएगी.

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रोहतक. दुनिया के तमाम बड़े देश कोरोना वायरस (Corona Virus) की वैक्सीन की खोज में जुटे हुए हैं. फिलहाल, सभी देश प्रयासरत हैं. भारत भी अपने स्तर पर कोशिशें करते हुए सफलता की ओर कदम रख रहा है. भारत बायोटेक और एनआईवी ने मिलकर कोरोना की वैक्सीन (Corona Vaccine) बनाने का दावा पेश किया है, जिसका पहले जानवरों पर ट्रॉयल सफल रहा है और कामयाबी हासिल हुई है. अब बारी मनुष्य के शरीर पर इस वैक्सीन को आजमाने की है, जिसके लिए डीसीजीआई ने रोहतक पीजीआई को अनुमति दी है.

हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी ओपी कालरा ने बताया की पीजीआई कोवैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने जा रहा है. वैक्सीन को मनुष्य पर इस्तेमाल करने से पहले  उस व्यक्ति की अनुमति ली जाएगी और उनकी सहमति के बाद ही ट्रायल शुरू किया जाएगा. ट्रायल दो फेज में होगा.

पहले फेज में 375 लोग और दूसरे फेज में 750 लोगों को रिक्रूट किया जाएगा. डॉ. कालरा ने बताया कि वैक्सीन के इस्तेमाल से सबसे पहले व्यक्ति का फुल बॉडी चेकअप होगा, जिसमें ये जांचा जाएगा कि व्यक्ति किसी बड़ी बीमारी से तो ग्रस्त नहीं है. जैसे एचआईवी, टीबी, कैंसर आदि. साथ ही व्यक्ति का कोविड टेस्ट भी होगा.



ये रिपोर्ट नार्मल आने पर दी जाएगी को-वैक्सीन
यदि व्यक्ति की रिपोर्ट नॉर्मल मिलती है और पूरी तरह स्वस्थ होता है तो फिर उसका ब्लड सैंपल लिया जाएगा और हीमोग्लोबिन की मात्रा नोट की जाएगी. ब्लड सैंपल के बाद कोवैक्सीन उस मनुष्य को दी जाएगी. पूरे 28 दिन बाद दोबारा ब्लड सैंपल लिया जाएगा और हीमोग्लोबिन की मात्रा नोट की जाएगी. इस 28 दिन के दौरान मनुष्य में एंटीबॉडी विकसित होगी. यानि कि डॉक्टर्स वैक्सीन देने से पहले और वैक्सीन देने के बाद की एंटीबॉडी लेवल की तुलना करेंगे.

पूरी प्रक्रिया में लगेंगे 6 महीने

ओपी कालरा ने बताया कि WHO के अनुसार एंटीबॉडी लेवल 4 गुना बढ़ता है तो कोवैक्सीन कोरोना को हराने में कारगर साबित होगी. इस प्रक्रिया में लगभग 6 महीने लग सकते हैं. माना जा रहा है कि यदि इसमें सफलता हासिल होती है तो अगले साल तक कोरोना की वैक्सीन मार्किट में उपलब्ध हो जाएगी. इस पूरी जांच की रिपोर्ट डीसीजीआई को सौंपी जाएगी.

 
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