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ट्रैक्टर वाली जमींदार बेटी, स्कूल के बाद खेत में बंटाती है पिता का हाथ

ट्रैक्टर वाली जमींदार बेटी, स्कूल के बाद खेत में बंटाती है पिता का हाथ

बेटी बोली- किसान को कभी अकेला महसूस न होने दें.

बेटी बोली- किसान को कभी अकेला महसूस न होने दें.

Daughter of Farmer: लक्ष्मी का कहना है कि बेशक फसल का भाव मंडियों में किसान को कम मिलता है. कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी फसल में बीमारी आने की वजह से किसान को घाटा उठाना पड़ता है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता कि किसान को हमेशा नुकसान ही उठाना पड़ता है, किसान को मुनाफा भी होता है.

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रोहतक. खेती किसान के लिए लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी मंडी का भाव किसान को उभरने नहीं देता. किसान (Farmer) हताश हो जाता है और खेती को छोड़ना चाहता है, लेकिन कोई विकल्प नहीं है, इसलिए इसे छोड़ भी नहीं पाता. दूसरी ओर, रोहतक (Rohtak) के सुनारिया गांव की रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी (12th class student Luxmi) की सोच काफी पॉजिटिव है. उसका कहना है कि अगर किसान के साथ उसका परिवार खड़ा है तो वह किसी भी मुसीबत का सामना आसानी से कर सकता है और इससे किसान का हौसला कभी पस्त नहीं हो सकता. उसके घर के लोग उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं तो मुसीबतें आसान हो जाती हैं.

लक्ष्मी 12वीं कक्षा की छात्रा है और पढ़ाई में भी काफी होशियार हैं. अपने पिता के साथ खेतों के काम में हाथ बंटाती हैं. वह कस्सी का काम भी करती हैं, खेतों में पानी भी देती हैं और ट्रैक्टर से जुताई भी कर लेती हैं. उसका मानना है कि लड़कियां किसी काम में पीछे नहीं है और कोई भी ऐसा काम नहीं है जिसे लड़कियां नहीं कर सकती.

खेती के बारे में लक्ष्मी का कहना है कि बेशक फसल का भाव मंडियों में किसान को कम मिलता है. कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी फसल में बीमारी आने की वजह से किसान को घाटा उठाना पड़ता है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता कि किसान को हमेशा नुकसान ही उठाना पड़ता है, किसान को मुनाफा भी होता है.

Daughter helps his farmer father by running tractor in field after school hrrm

किसान की बेटी

किसान को अपने परिवार का सहयोग मिलना चाहिए

लक्ष्मी ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि किसान को अपने परिवार का सहयोग मिलना चाहिए, घर के हर सदस्य को उसका हाथ बढ़ाना चाहिए. इससे उसे हौसला मिलता है और हर मुसीबत को आसानी से पार कर लेता है. दिक्कत तब आती है जब किसान अकेला पड़ जाता है, उसे खेत का सारा काम मजदूरी पर कराना पड़ता है.

स्कूल से आकर बंटाती हैं पिता का हाथ

किसान की सारी मेहनत मजदूरी में चली जाती है और अगर सही मायनों में बात की जाए तो किसान को उसकी मजदूरी ही बचती है और वही उसकी कमाई होती है. इसलिए परिवार को खेती में सहयोग जरूर करना चाहिए तभी एक किसान सफल हो सकता है. मैं भी स्कूल से आकर अपने पिता का खेत के काम में हाथ बंटाती हूं.

Tags: Haryana Farmers, Haryana news, Rohtak News

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