राज्यसभा में कृषि कानूनों पर भिड़े कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और दीपेंद्र हुड्डा, हुई तीखी बहस

राज्यसभा में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जैसे ही कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग का जिक्र किया, हंगामा होने लगा.

राज्यसभा में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जैसे ही कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग का जिक्र किया, हंगामा होने लगा.

Deepender Hooda vs Narendra Singh Tomar: राज्यसभा में नए कृषि कानूनों पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा ने जमकर बहस हुई. कृषि मंत्री ने कहा कि दोबारा से कृषि कानून पर बहस हो तो आप पढ़कर आइए, मैं जवाब दे दूंगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 7:01 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने शुक्रवार को राज्यसभा में नए कृषि कानूनों पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया. कृषि मंत्री ने साफ संकेत दिया कि सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेगी. हालांकि, जब तोमर ने हरियाणा और पंजाब के कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग एक्ट की खामियों की ओर इशारा किया तो कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा (Deepender Singh Hooda) ने उन्हें टोका. इस पर दोनों में जमकर बहस हुई. कृषि मंत्री ने कहा कि दोबारा से कृषि कानून पर बहस हो तो आप पढ़कर आइए, मैं जवाब दे दूंगा.

सदन में कृषि मंत्री तोमर ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा. मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है.'

उन्होंने आगे कहा, 'भारत सरकार कानूनों में किसी भी संशोधन के लिए तैयार है इसके मायने ये नहीं लगाए जाने चाहिए कि कृषि कानूनों में कोई गलती है. पूरे एक राज्य में लोग गलतफहमी का शिकार हैं. किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन ले जाएंगे.'

कृषि मंत्री तोमर ने कहा, 'दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। खून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है, भारतीय जनता पार्टी खून से खेती नहीं कर सकती.'

कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के मुद्दे पर हुआ हंगामा



राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग की चर्चा की. तोमर ने कहा, 'कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में किसान को बोनस, फसल का मूल्य तय किया है. किसान इस कॉन्ट्रैक्ट से कभी भी बाहर हो सकता है. हरियाणा और पंजाब के कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को भी देख लिया जाना चाहिए. हरियाणा का कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग तो हुड्डा सरकार के दौरान बना था." तोमर के इस बयान पर जमकर हंगामा हुआ. फिर कृषि मंत्री ने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा, 'पंजाब के कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में किसान के जेल जाने का प्रावधान है.'

कृषि मंत्री ने सदन और देश को गुमराह किया: हुड्डा





राज्यसभा के बाहर दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कृषि मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'आज कृषि मंत्री ने सदन और देश को गुमराह करने का काम किया. उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब का आंदोलन है परंतु इस आंदोलन में हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान यहां तक की महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी किसान शामिल हैं. मुझे निशाने पर लिया क्योकि मैने किसान की बात उठाई, मुझे परवाह नही. दुर्भाग्य ये है कि किसान की बात को कृषि मंत्री ने सिरे से नकारा. इस आंदोलन को एक प्रदेश का बताना किसान का अपमान है, सरकार अविलंब राजहठ छोड़े और प्रजा की बात मानें, और देश को गुमराह न करे.'

वहीं, कृषि मंत्री सदन के बाहर आज की बहस पर कहा, 'मैंने आज राज्यसभा में देखा विपक्ष कृषि बिलों को काला कानून कह रहे हैं. वे यह नहीं बता रहे हैं कि उसमें काला क्या है. कानून का विरोध कर रहे हैं तो कानून के प्रावधान पर चर्चा होनी चाहिए. मैंने सभी दल और किसानों से कहा है कि सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है.'
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