हरियाणा: मज़दूरी और डीजल की बढ़ी कीमतों ने तोड़ी किसान की कमर, धान की रोपाई की लागत बढ़ी
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हरियाणा: मज़दूरी और डीजल की बढ़ी कीमतों ने तोड़ी किसान की कमर, धान की रोपाई की लागत बढ़ी
किसानों की चिंता बढ़ी

किसानों को चिंता है कि धान की बढ़ती लागत की भरपाई कैसे होगी. 25 फीसद ज्यादा मज़दूरी के साथ बारिश न होने तक खेतों की सिंचाई भी ट्यूबवेल से करानी पड़ेगी.

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रोहतक. धान की रोपाई करने में किसानों को इस बार काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. एक तो लेबर की कमी के चलते उन्हें महंगी दरों पर धान की रोपाई करानी पड़ रही है, तो दूसरी तरफ लगातार डीज़ल के बढ़ रहे रेट के चलते खेत की सिंचाई की लागत बढ़ गई है. लाकडाउन की मार खेतों में काम कर रही महिलाओं पर भी पड़ी है. अब किसानों को चिंता है कि धान की बढ़ती लागत की भरपाई कैसे होगी. 25 फीसद ज्यादा मज़दूरी के साथ बारिश न होने तक खेतों की सिंचाई भी करनी पड़ेगी. प्रति एकड़ 10 हज़ार तक खर्च कर रहे किसान के लिए मुनाफा तो क्या लागत भी निकल आए तो गनीमत है.

महिलाओं को खेतों में करना पड़ रहा काम
धान की रोपाई करने वाली महिलाओं ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और लॉकडाउन के दौरान काम धंधा बंद हो गया था. मजदूरी कहीं मिली नहीं, इसलिए अब खेतों में काम करने के लिए आए हैं, ताकि अपने घर का गुजर-बसर कर सकें. वहीं, किसानों की चिंता है कि धान की फसल में लागत लगातार बढ़ती जा रही है, इसकी भरपाई कैसे होगी. अभी तक प्रति एकड़ 10 हजार रुपये से ज्यादा का खर्च हो चुका है. जब तक बारिश नहीं होगी तब तक खेत की सिंचाई भी लगातार करनी पड़ेगी.

25 फीसद ज्यादा मजदूरी देनी पड़ रही
वहीं, लॉकडाउन की वजह से इस बार किसानों पर दोहरी मार पड़ी है. खेतों में काम करने वाले मजदूरों को तकरीबन 25 फीसदी ज्यादा मजदूरी देनी पड़ रही है. पिछले साल 1 एकड़ धान की रोपाई 3 हजार में होती थी, जो कि इस बार बढ़कर 4 हजार रुपये हो गई है. इसके अलावा हर रोज बढ़ रहे डीजल के दामों में भी किसानों की कमर तोड़ दी है. खेत में सिंचाई करने के लिए किसान को ट्यूबवेल चलाना पड़ रहा है, जिससे उसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है.
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