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अब हरियाणा भी जाना जाएगा बब्बर शेर के नाम से

बब्बर शेर
बब्बर शेर

शेरनी ने अपने इन तीनों बच्चों को भी त्याग दिया था, इनको अपना दूध नहीं पिलाया.

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हरियाणा के लिए खुशी की बात है कि प्रदेश में अब आपको बब्बर शेर देखने को मिलेंगे. रोहतक के मिनी चिड़ियाघर में एशियाटिक शेर के तीन शावकों को कठिन परिस्थितियों में बचा लिया गया है और अब वे एक साल के हो गए हैं, जोकि काफी स्वस्थ हैं. इन तीनों शावकों को 6 महीने बाद आम जनता को दिखाया जाएगा.

शेरनी ने बच्चों को त्याग दिया

दरअसल एक साल पहले पीपली जू में एशियाटिक नस्ल की जो शेरनी लाई गई थी, उसने 5 शावकों को जन्म दिया था, जिनमें दो मृत पैदा हुए थे. लेकिन दुर्भाग्यवश शेरनी ने अपने इन तीनों बच्चों को भी त्याग दिया था, इनको अपना दूध नहीं पिलाया.



नवजात शावकों को रोहतक चिड़ियाघर किया शिफ्ट
नवजात शावक भूख से तडपने लगे तो इस स्थिति को लेकर जू अथॉरिटी ने केन्द्रीय अथॉरिटी को अवगत कराया तो तुरंत इन्हें रोहतक चिड़ियाघर में शिफ्ट करने के आदेश दिए गए. इन आदेशों के साथ साथ रोहतक जू को भी शावकों की देखभाल और फीडिंग कराने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए. इन शावकों के लिए शुरू के तकरीबन 6 महीने तक अमेरिका से दूध मंगाया गया. जैसे जैसे ये बड़े होते गए, इनके डाइट चार्ट में भी बदलाव किया जाने लगा. इनमें एक नर और दो मादा शावक हैं, तीनों काफी स्वस्थ हैं और अब पूरे एक साल के हो गए हैं.

इन्हें कहते हैं एशियाटिक शेर

मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी डा. दीपक अलावादी ने बताया कि इनकी परवरिश में बेहद सावधानी बरती गई है और ये काफी दुर्लभ प्रजाति के शावक हैं, जोकि सिर्फ एशिया में पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें एशियाटिक शेर कहते हैं. सबसे खास बात ये है कि भारत में सिर्फ गुजरात में ही एशियाटिक नस्ल देखने को मिलती है. अब हरियाणा में भी इसकी ब्रिडिंग पर हम ध्यान देंगे और उम्मीद है कि हमारे प्रदेश को भी बब्बर शेर के नाम से जाना जाएगा.

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