मिलिए हरियाणा के ‘पैडमैन’ से, जो प्रवासी मजदूरों के घर-घर जाकर बांट रहे सेनेटरी पैड

जगदीप को इस काम में काफी सहयोग मिला

जगदीप को इस काम में काफी सहयोग मिला

Padman of Haryana: जगदीप की पत्नी ने शहर की कई कॉलोनियों में रहने वाले प्रवासी परिवारों की महिलाओं और किशोरियों को घर-घर जाकर सेनेटरी पैड देने शुरू कर दिए.

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रोहतक. बॉलीवुड फिल्म में आपने पैडमैन (Padman) की कहानी देखी होगी. समाज को जागरूक करने के लिए वह एक काल्पनिक कथा थी. लेकिन आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं रियल लाइफ के पैडमैन से, जो एक अलग ही अलख जगाए हुए हैं. इस पैडमैन का नाम जगदीप (Jagdeep) है, लेकिन उसने अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पत्नी सुनीता और कई अन्य समाज सेवा से जुड़े लोगों की भी सहायता ली.

साल 2020 में जब कोरोना महामारी ने दस्तक दी तो सरकार ने देशभर में लॉकडाउन लगा दिया. लोगों के रोजगार छिन गए, प्रवासी मजदूरों के सामने भोजन तक के लाले पड़ गए. इस संकट की घड़ी में कई सामाजिक संस्थाओं ने आगे आकर लोगों की मदद की और उन्हें राशन मुहैया कराया. इस मुहिम में एनजीओ अनुभव टोली से जगदीप और उसकी पत्नी सुनीता भी लगे हुए थे. लेकिन एक दिन जब सुनीता राशन बांटने गई तो कुछ प्रवासी महिलाओं ने उसे अपनी परेशानी बताई और कहा कि उन्हें राशन तो मिल रहा है, दुकानें बंद होने के कारण उन्हें सेनेटरी पैड नहीं मिल पा रहे.

महिलाओं और किशोरियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इन महिलाओं की परेशानी समझ कर सुनीता ने अपने पति जगदीप से चर्चा की और कहा कि हम इनका कैसे सहयोग कर सकते हैं. इसके बाद जगदीप ने कई सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया और एक योजना तैयार की कि शहर के अंदर रहने वाले प्रवासी परिवारों की किशोरियों और महिलाओं को उनके घरों तक मुफ्त सेनेटरी पैड भिजवाएं जाएं, ताकि वे स्वच्छता का ध्यान रखें और किसी तरह की बीमारियों की चपेट में ना आए.

जगदीप को इसमें काफी सहयोग मिला और उन्होंने और उनकी पत्नी ने शहर की कई कॉलोनियों में रहने वाले प्रवासी परिवारों की महिलाओं और किशोरियों को घर-घर जाकर सेनेटरी पैड देने शुरू कर दिए. पिछले 1 साल से यह सिलसिला यूं ही चल रहा है और अब तो उनकी मदद के लिए कई छात्राएं भी आगे आई हैं. जो हर महीने इन कालोनियों में जाती हैं और महिलाओं को उनकी जरूरत के मुताबिक उनके घर पर ही सेनेटरी पैड मुहैया कराती हैं और साथ-साथ उनको स्वच्छता को लेकर जागरूक भी करती हैं.
इन छात्राओं का कहना है कि उन्हें अच्छा लगता है कि जो महिलाएं अज्ञानता के कारण अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं होती, उनको हम स्वच्छता के बारे में बताते हैं. साथ ही जिनको कभी भी सेनेटरी पैड की जरूरत होती है तो वह हमारे अनुभव टोली कार्यालय से किसी भी वक्त ला सकती हैं.

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