लाइव टीवी

रोहतक: हाईकोर्ट और राजभवन के आदेशों को भी नहीं मानते PGI के मठाधीश!
Rohtak News in Hindi

Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: March 18, 2020, 9:57 AM IST
रोहतक: हाईकोर्ट और राजभवन के आदेशों को भी नहीं मानते PGI के मठाधीश!
पीजीआई रोहतक के डॉक्टरों की मनमानी

गंभीर मामलों की जांच न करना पीजीआई अथॉरिटी (PGI Authority) की भूमिका पर भी कहीं न कहीं संदेह पैदा करता है, जोकि महामहिम राज्यपाल (Governor) के आदेशों की भी अवमानना है.

  • Share this:
रोहतक. कहने को बेशक स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज (Anil Vij) सूबे के सेहत मंत्रालय की गद्दी के शहंशाह हैं, लेकिन असली मठाधीश रोहतक के पीजीआई (Rohtak PGI) में ही पाए जाते हैं, जिनका बाल भी बांका कर पाना किसी के भी बस की बात नहीं है. वैसे तो यहां पर ईमानदार और निष्ठावान डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है और उन्हीं के दम पर ये संस्थान पूरे प्रदेश की शान भी है. लेकिन हर जगह की तरह यहां पर भी कुछ ऐसे महानुभाव हैं, जो सिर्फ राजनीतिक कुश्ती करते हैं, जो कई बार असल में नूरा कुश्ती होती है. यहां की सबसे बडी कुश्ती कुर्सी की लडाई होती है, क्योंकि कुर्सी मिलते ही ताकत कई गुणा बढ़ जाती है. एक हकीकत ये भी है कि एक बार कुर्सी मिल जाए तो बाद में कुर्सी बेशक टूट जाए, लेकिन छोड़ेंगे नहीं.

पीजीआई का निदेशक बनना हो या मेडीकल सुपरिडेंट बनना हो या किसी विभाग का अध्यक्ष या फिर किसी कमेटी का चेयरमैन आदि. यहां के कुछ डॉक्टर्स कुर्सी पाने के लिए नेताओं के दरवाजों पर परिक्रमा करने के लिए दिल्ली से लेकर चंडीगढ तक ऐसी रफ्तार पकड़ लेते हैं कि जिन्हें देखकर फार्मूला-वन चैम्पियन माइकल शूमाकर भी पसीना-पसीना हो जाए.

किसी की क्या मजाल की डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई हो जाए



इस संस्थान में बहुत कम ऐसे डॉक्टर होंगे, जिनके खिलाफ कोई परिवाद न चल रहा हों. कुछ डॉक्टरों के खिलाफ झूठी शिकायतें भी होती हैं. कुछ के खिलाफ लापरवाही, मनमानी और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर शिकायतें भी होती हैं. खानापूर्ति के लिए जांच कमेटी बनाई जाती हैं. कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपती है, ज्यादातर में आरोपी डाक्टर को क्लीन चिट दे दी जाती है और अगर किसी जांच में डाक्टर दोषी पाया भी जाता है तो किसी की क्या मजाल की डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई हो जाए. इसकी सबसे बडी वजह ये है कि डाक्टर के भी “राजनैतिक हाथ” बहुत लम्बें हैं, फिर चाहे आदेश संवैधानिक संस्थाओं का क्यों न हो. उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है.



हाईकोर्ट और राज्यपाल के आदेशों को दिखाया जाता है ठेंगा

आपको रूबरू कराते हैं कि कैसे हाईकोर्ट और राज्यपाल के आदेशों तक को ठेंगा दिखाया जाता है. दरअसल 10 फरवरी 2020 को मेडीकल एजुकेशन एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की तरफ से हरियाणा के राज्यपाल का हवाला देकर जांच के निर्देश दिए गए कि रोहतक पीजीआई के पूर्व निदेशक डॉक्टर राकेश गुप्ता के कार्यकाल की जांच कर एक महीने में रिपोर्ट दी जाए. जांच की जिम्मेदारी मेडीकल एजुकेशन एवं अनुसंधान के निदेशक, रोहतक पीजीआई के निदेशक औऱ पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी गई थी. लेकिन सूत्रों के हवाले से हमें जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक एक महीना बीत चुका है, लेकिन रिपोर्ट भेजना तो दूर, यहां पर जांच ही शुरू नहीं की गई है.

गंभीर मामलों की नहीं की जाती जांच

इससे पहले भी दिसम्बर 2018 में राजभवन से जांच के आदेश आ चुके हैं, लेकिन जांच नहीं शुरू की गई. दरअसल डाक्टर राकेश गुप्ता जोकि जून 2015 से सितम्बर 2017 तक पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक थे. इस दौरान उनके कार्यकाल में कई मामले सामने आए, जिनमें गार्ड घोटाला, गैस घोटाला, इम्प्लांट केस, बच्चा चोरी, ईशा अली केस, नर्स प्रकरण आदि मामले काफी सुर्खियों में रहे. इन सभी मामलों में डाक्टर राकेश गुप्ता की भूमिका की जांच की जानी है. लेकिन इतने गंभीर मामलों की जांच न करना पीजीआई अथॉरिटी की भूमिका पर भी कहीं न कहीं संदेह पैदा करता है, जोकि महामहिम राज्यपाल के आदेशों की भी अवमानना है.

आपत्ति के बावजूत किया प्रमोट

इन्हीं मामलों में एक नर्स प्रकरण भी है, जोकि नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी का जीता जागता सबूत है, जिस पर हाईकोर्ट ने भी कडी आपत्ति जताई है. लेकिन देखिए किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई गई. मेडीकल की एक स्टाफ नर्स को 15 अक्टूबर 2016 को कागजों में फर्जीवाडा करके छुट्टियां स्वीकृत की गई. इसमें डॉ. राकेश गुप्ता और डॉ. आरबी जैन पर नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगा. इस मामले की जांच के लिए हैल्थ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन सीवीओ डॉ. आरबी सिंह को 26 अक्टूबर 2016 मामले की जांच सौंपी. जांच के दौरान ही 8 फरवरी 2017 को कम्यूनिटी मेडीसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएम वशिष्ट की आपत्ति के बावजूद हैल्थ यूनिवर्सिटी ने डॉ. आरबी जैन को फ्लोटिंग सीनियर प्रोफेसर के पद पर प्रमोट कर दिया.

क्या आदेशों की होगी पालना?

यूनिवर्सिटी के सीवीओ डा. आरबी सिंह ने 19 अप्रैल 2017 को रिपोर्ट सौंपी और उसमें डा. राकेश गुप्ता और डा. आरबी जैन पर फर्जीवाडा करने और नियमों को ताक पर रखने का दोषी पाया. इस मामले में हैल्थ यूनिवर्सिटी की तरफ से पीजीआई निदेशक को 5 जुलाई 2017 को एक्शन लेने के लिए पत्र लिखा गया. लेकिन हैरत की बात देखिए कि जांच की फाइल ही गुम हो गई. इस दौरान डॉ. आरबी जैन को एक मार्च को विभागाध्यक्ष बना दिया गया. इस मामले को लेकर कम्यूनिटी मेडीसिन के प्रोफेसर डा. बीएम वशिष्ट ने हाईकोर्ट का रुख किया तो कोर्ट ने 3 मार्च को इस पर कडा संज्ञान लेते हुए आदेश दिए हैं कि यूनिवर्सिटी एक्जीक्यूटिव काऊंसिल की मीटिंग में डॉ. आरबी जैन की पदोन्नति को रोकने का फैसला ले. अब देखना ये है कि हाईकोर्ट और राज्यपाल के आदेशों की पालना होगी या नहीं.

ये भी पढ़ें:

बड़े जल संकट की कगार पर रेवाड़ी, कुमारी शैलजा ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा 
हरियाणा में 2017 से पहले के सभी किसान क्लब भंग, मुख्यमंत्री ने दिए आदेश
First published: March 18, 2020, 9:57 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading