सीएम खट्टर के पैतृक गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के बुरे हाल
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सीएम खट्टर के पैतृक गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के बुरे हाल
तीन साल पहले तक यह अस्पताल 24 घंटे खुला रहता था

रोहतक के बनियानी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. इसके तहत 10 गांव आते हैं, तीन साल पहले तक यह अस्पताल 24 घंटे खुला रहता था, महिलाओं की डिलीवरी भी होती थी

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प्रदेश सरकार बेशक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर हालात इतने अच्छे नहीं हैं. कहीं जर्जर इमारतें हैं, कहीं डॉक्टर्स नहीं तो कहीं दवाईयां नहीं, सीएम मनोहर लाल के पैतृक गांव बनियानी में मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात देखिए, आपको हकीकत पता लग जाएग.

रोहतक के बनियानी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. इसके तहत 10 गांव आते हैं, तीन साल पहले तक यह अस्पताल 24 घंटे खुला रहता था, महिलाओं की डिलीवरी भी होती थी. बाकायदा डेंटल चेयर भी लगाई गई है और लैब टैस्टिंग की भी सुविधा स्थापित की गई थी. फिलहाल यहां पर कोई लैब टैक्नीशियन नहीं है, काफी अरसे बाद एक डैंटिस्ट नियुक्त की गई हैं, जो सप्ताह में दो दिन आती हैं.

कहने को दो मैडीकल ऑफिसर हैं, लेकिन उनकी कलानौर या किसी अन्य स्थान पर इमरजेंसी ड्यूटी लगा दी जाती है. यहां कभी कभार ही आते हैं. स्टाफ नर्स की दो पोस्ट स्वीकृत हैं, लेकिन एक खाली है. अगर कोई महिला डिलीवरी के लिए आती है तो उसे कलानौर या रोहतक रैफर करना पड़ता है.



बिल्डिंग भी होती जा रही जर्जर
हालात ये हैं कि उपकरण होने के बावजूद यहां उनका उपयोग करने वाला स्टाफ ही तैनात नहीं है. पहले एक लैब टैक्नीशियन थी, उसे भी कहीं ओर शिफ्ट कर दिया. यानि जिस अस्पताल पर 10 गांवों की जिम्मेदारी है, वह सफेद हाथी बनकर रह गया और बिना देखरेख के इसकी बिल्डिंग भी जर्जर होती जा रही है.

अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे

वहीं, इस बारे में अधिकारियों से बात करनी चाहिए तो कोई भी कुछ भी कहने से बचता नजर आया. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सीएम के गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के ये हालात हैं तो बाकि प्रदेश का क्या होगा.

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