रोहतक गैंगरेप केस: हाईकोर्ट ने सातों दोषियों की फांसी की सजा को रखा बरकरार
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रोहतक गैंगरेप केस: हाईकोर्ट ने सातों दोषियों की फांसी की सजा को रखा बरकरार
रोहतक गैंगरेप केस

ये फैसला जस्टिस एबी चौधरी आधार डिविजन बेंच ने सुनाया है. हाईकोर्ट ने भी सातों दोषियों की हैवानियत को रेअर ऑफ रेअरेस्ट की श्रेणी में रखा है.

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एक घटना जिसने हरियाणा को हिला दिया था. एक वारदात जिसने लोगों की रूह कंपा दी थी, एक केस जिसमें सभी बालिग दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी. 9 दोषियों ने मानसिक रूप से बीमार युवती के साथ हैवानियत की सारे हदें पार की थी. उन दरिंदों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से सज़ा में रियायत की मांग की. लेकिन हाईकोर्ट ने सातों दोषियों की मौत की सज़ा बरकार रखी है.

ये फैसला जस्टिस एबी चौधरी आधार डिविजन बेंच ने सुनाया है. हाईकोर्ट ने भी सातों दोषियों की हैवानियत को रेअर ऑफ रेअरेस्ट की श्रेणी में रखा है. इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने दोषियों की प्रॉपर्टी की ऑक्शन कर 50 लाख रुपये की राशि जमा करने के आदेश दिए है, जिसमें 25 लाख रुपये मृतका की बहन और 25 लाख रुपये हरियाणा सरकार को दिए जाने के आदेश दिए हैं.

बता दें कि ये मामला फरवरी 2015 का है जब हरियाणा में निर्भया से हैवानियत की गई थी. दरअसल नेपाली मूल की एक लड़की के साथ सात आरोपियों ने गैंगरेप किया था और उसके साथ हैवानियत करते हुए मौत के घाट उतार दिया था.



इस मामले में रोहतक जिला अदालत ने महज 10 महीने में सुनवाई पूरी करते हुए सजा का एलान किया. 9 दरिंदों में से 7 दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी. एक दोषी नाबालिग है, जिसे 2018 में तीन साल सज़ा सुनाते हुए बाल सुधार भेजा गया.  जबकि एक दोषी ने केस की सुनवाई के दौरान खुदकुशी कर ली थी.
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