रोहतक गैंगरेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी की सजा पर लगाई रोक
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रोहतक गैंगरेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी की सजा पर लगाई रोक
नेपाली मूल की एक लड़की के साथ सात आरोपियों ने गैंगरेप किया था

फरवरी 2015 में रोहतक में मानसिक रूप से एक बीमार युवती से गैंगरेप किया गया था. दरिंदों ने इसके बाद उन्‍हें जलाने की भी कोशिश की थी.

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एक घटना जिसने हरियाणा को हिला दिया था. एक वारदात जिसने लोगों की रूह कंपा दी थी, एक केस जिसमें सभी बालिग दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी. दरअसल, रोहतक में 9 दोषियों ने मानसिक रूप से बीमार युवती के साथ हैवानियत की सारे हदें पार कर दी थीं. उन दरिंदों ने हाईकोर्ट से सज़ा में रियायत की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने सातों दोषियों की मौत की सज़ा बरकार रखी थी. इसके बाद उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अब शीर्ष अदालत ने सातों दोषियों की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया है.

रोहतक गैंगरेप का यह वीभत्‍स मामला फरवरी 2015 का है. दरअसल, नेपाली मूल की एक लड़की के साथ सात आरोपियों ने गैंगरेप किया था और बाद में उनकी हत्‍या कर दी थी. इस हैवानियत से मानवता शर्मसार हो गई थी. इस मामले में रोहतक जिला अदालत ने महज 10 महीने में सुनवाई पूरी करते हुए सजा का ऐलान कर दिया था. नौ दरिंदों में से 7 दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी. एक दोषी नाबालिग है, जिसे 2018 में तीन साल की सज़ा सुनाते हुए बाल सुधार गृह भेजा गया था. वहीं, एक दोषी ने केस की सुनवाई के दौरान खुदकुशी कर ली थी.

जानें पूरे मामले में अब तक क्या क्या हुआ



रोहतक में भी नेपाली मूल की 28 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला के साथ गैंगरेप हुआ था. फरवरी 2015 में हुई यह घटना इतनी वीभत्स थी कि इसकी गूंज देश भर में सुनाई दी. पीड़ि‍ता से गैंगरेप के बाद उनके शरीर को जलाने की कोशिश की गई थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि महिला के शरीर के कई अंग भी रेप के बाद निकाले गए थे. 1 फरवरी 2015 को नेपाली युवती घर से गायब हुई थी और 4 फरवरी को निर्वस्‍त्र अवस्था में उनका शव मिला था. हरियाणा पुलिस ने 21 जुलाई 2015 को कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी.
3 सितंबर पुलिस ने दो महीने बाद कोर्ट में पूरक चालान पेश किया था. 15 अक्तूबर पहली गवाही हुई थी. लगातार 9 दिनों तक गवाही देने का दौर चला था और 30 नवंबर 2015 को यह प्रक्रिया पूरी हुई थी. 1 से 7 दिसंबर तक आरोपियों के 313 के तहत बयान दर्ज किए गए. मामले में 21 दिसंबर 2015 को आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी.

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