पीजीआई सिक्योरिटी गार्ड घोटाले का जिन्न फिर आया बाहर

प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू हुई तो मचा हडकंप.

Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: September 12, 2018, 6:35 PM IST
पीजीआई सिक्योरिटी गार्ड घोटाले का जिन्न फिर आया बाहर
रोहतक पीजीआई
Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: September 12, 2018, 6:35 PM IST
पीजीआई रोहतक के बहुचर्चित सिक्योरिटी गार्ड घोटाले का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकल आया है और इस बार जांच की आंच आला प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई. इस घोटाले के लिए मैडीकल की विभागीय जांच में दो सिक्योरिटी ऑफिसर को बलि का बकरा बनाकर उन्हें निलम्बित कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था. लेकिन डीएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने उन तमाम जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को तलब कर इस मामले में नया मोड ला दिया. मामला भ्रष्टाचार से जुडा होने के कारण उन तमाम अधिकारियों की भूमिका जांची जा रही है, जिनकी लापरवाही या मिलीभगत से 78 लाख रूपए का घोटाला हुआ.

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एक साल पुराने इस मामले से जुडे तमाम दस्तावेजों को जांचने के लिए मंगलवार को पीजीआई थाने में सभी जिम्मेदार अधिकारियों से रिकॉर्ड मांगा गया. जिन प्रशासनिक अधिकारियों से डॉक्यूमेंट्स मांगे गए, उनमें डिप्टी मैडीकल सुपरिडेंट, मैडीकल सुपरिडेंट कार्यालय, लेखा विभाग, वित्त विभाग, निदेशक कार्यालय और रजिस्ट्रार कार्यालय के नाम शामिल हैं. क्योंकि सिक्योरिटी कम्पनी जो भी बिल क्लेम करती थी, वह इन सभी विभागों से चेक होकर क्लियर होता था. इस मामले में उन दोनों सिक्योरिटी ऑफिसर से भी कागजात लिए गए हैं, जिन्होंने इस पूरे घपले को पकड़ा था, जिन्हें बाद में विभागीय जांच के बाद सस्पेंड कर दिया गया था.

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अचानक से एसआईटी की इस कार्रवाई से पीजीआई मेडीकल में हडकंप मचा हुआ है औऱ कोई भी अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने से बच रहा है. मेडीकल सुपरिडेंट से बात की तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि एसआईटी ने जो डॉक्यूमेंट मांगे हैं, वे दे दिए गए और जिस वक्त ये घोटाला हुआ था, वे तब मेडीकल सुपरिडेंट नहीं थे. इससे ज्यादा वे कुछ नहीं कह सकते.

वहीं, निलम्बित सिक्योरिटी ऑफिसर्स का कहना है कि इस पूरे घोटाले का उन्होंने ही पकड़ा और कम्पनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को लिखा. लेकिन कम्पनी के खिलाफ एक्शन लेने की बजाए उसे एक्सटेंशन दी गई और हमें सस्पेंड किया गया. विभागीय जांच में उनके साथ न्याय नहीं किया गया और न ही ये साबित किया गया कि किस तरह से वे जिम्मदार हैं. हां अब पुलिस की एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है तो उम्मीद है कि असली भ्रष्टाचारी को सामने लाया जाएगा. विभाग ने तो उन्हें ईनाम देने की बजाए प्रताड़ित करने का काम किया है.

बता दें कि 2017 में पीजीआई रोहतक में ओरियन सिक्योरिटी सोल्यूशंस नाम की सिक्योरिटी एजेंसी ने फर्जी तरीके से बिल बनाकर पीजीआई से पैसा क्लेम किया. जितनी संख्या में सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाते थे, उससे ज्यादा दिखाकर ये पैसा वसूला जाता था. पीजीआई के सिक्योरिटी ऑफिसर बादाम सिंह राठी और संजय सांगवान ने कम्पनी के इस फर्जीवाडे को पकडकर प्रबंधन के सामने डिटेल्स रिपोर्ट बनाकर भेज दी और कम्पनी की सिक्योरिटी जब्त करने, बिल रोकने आदि जैसी सिफारिशें की. विभागीय जांच हुई तो दोनों अधिकारियों की तमाम सिफारिशें लागू कर दी और साथ में ये भी अनुशंसा कर दी कि बगैर इन अधिकारियों की सहमति से ये घोटाला नहीं हो सकता, इसलिए इन पर भी कार्रवाई की जाए. हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी ने दोनों अधिकारियों को सस्पैंड कर दिया और अब तकरीबन एक साल बाद पुलिस जांच घेरे में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच होने लगी तो हडकंप मच गया.
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