COVID-19: शौहर की कब्र के दीदार को तरसती आंखे! महज कुछ घंटों में लुट गया इशरत का जहां

पति की कोरोना से मौत (प्रतिकात्मक तस्वीर)
पति की कोरोना से मौत (प्रतिकात्मक तस्वीर)

19 मई को दोपहर तकरीबन 2 बजे एक फोन आता है कि आप रजा की पत्नी हो क्या. जब मैंने बताया कि हां, तो उधर से जवाब आया कि आप कहां है. थोड़ी देर बाद मुझे सी-ब्लॉक में ले गए और मुझे बताया कि आपके पति की मौत हो गई.

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रोहतक. अस्पताल के बेड पर लेटी-लेटी इशरत खातून अपनी किस्मत को कोस रही है. ऊपर वाले से हिसाब मांग रही है, क्यों किसी फिल्म डायरेक्टर की माफिक महज कुछ घंटों में उसकी जिंदगी को तबाह कर डाला. रोहतक पीजीआई (Rohtak PGI) का डे-केयर सैंटर, यहां कोरोना पॉजीटिव (Corona Positive) इशरत खातून के लिए एक-एक पल बोझ की तरह बढ़ता जा रहा है. कभी 75 किलोमीटर दूर गुरुग्राम में अपनी अम्मी और अब्बा की राह तकती तीन बेटियों मुसरत, मनतशां और कहकशां के मासूम चेहरे जेहन में उतर आते हैं तो कभी 5 किलोमीटर दूर रोहतक के खोखराकोट के कब्रिस्तान में दफन शौहर मोहम्मद रजा का पहले जैसा हंसता हुआ चेहरा आत्मा को कचोट जाता है. ये क्या हो गया, अचानक सबकुछ तो लुट गया इस बेबस, लाचार इशरत का.

बेटियों को बहुत पढ़ाने चाहते थे रजा और इशरत. हर रोज उनके लिए ख्वाब बुनते थे, पर अचानक ऐसी कयामत आई कि सपनों का महल ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. गुरुग्राम के सेक्टर-53 के एक अपार्टमेंट में रहने वाले मोहम्मद रजा, जोकि फॉस्ट फूड डिलीवरी का काम करते थे. घर में बीबी इशरत खातून और तीन बेटियां, जिनमें बडी बेटी की उम्र 8 साल तो सबसे छोटी की महज 2 साल है. लॉकडाउन के कारण रजा का काम बंद हो गया था, लेकिन मई आते-आते काम धीरे-धीरे शुरू हो गया.

रजा की तबीयत बिगड़ गई



परिवार में खुशी का माहौल था, क्योंकि जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर आ रही थी. 16 मई, रात तकरीबन 8 बजे के आसपास रजा की तबीयत खराब होनी शुरू हो गई. सांस लेने में दिक्कत, बुखार आदि लक्षण लगभग कोरोना जैसे ही प्रतीत हो रहे थे. रजा की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई, समझ आ रहा था कि सबकुछ ठीक नहीं है. मदद के लिए गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम को फोन किया, लेकिन जवाब मिला कि एम्बुलेंस नहीं है. ब्रिजेन्द्र नाम के पड़ोसी से मदद मांगी, उसने भी कोशिश की, पर जवाब एक ही मिलता रहा कि एम्बुलेंस आएगी तो भेजेंगे. जब मदद नहीं मिली तो निजी अस्पताल में गए, वहां कुछ रूपए गंवाकर वापस घर आ गए.
रोहतक पीजीआई किया रेफर

17 मई की सुबह रजा को बाइक पर बैठाकर ब्रिजेन्द्र गुरूग्राम के सिविल अस्पताल लेकर गया. वहां पर काफी लम्बी लाईन थी, मुश्किल से तकरीबन 2 घंटे में ओपीडी कार्ड बना. उसके बाद रजा के लक्षण देखे और कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए. डॉक्टर्स ने उसकी हालत को देखते हुए रोहतक पीजीआई के लिए रेफर कर दिया. मोहम्मद रजा ने अपनी बीबी इशरत को फोन कर बताया कि उसे रोहतक भेजा जा रहा है, शायद कोरोना है.

रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव

17 मई की शाम को पीजीआई के ट्रामा सेंटर में रजा को दाखिल कर लिया गया और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जाने लगा. अगले दिन रिपोर्ट आई तो पता चला कि वह कोरोना पॉजीटिव है. इतना सुनते ही इशरत खुद पर काबू नहीं पर पाई और अपने तीनों छोटे-छोटे बच्चों को अपने पिता के पास छोडकर 18 मई की शाम पड़ोसी के साथ बाइक पर बैठकर रोहतक पीजीआई पहुंच गई. यहां आई तो पता चला कि कोरोना मरीजों से मिल नहीं सकते, वह लगातार पति से फोन पर बात करती रही और रजा उसे दिलासा देते रहे कि वह ठीक है, चिंता मत करो.

रात 2 बजे फोन किया तो बोला सब ठीक

रात हो चुकी थी, कहीं रहने-खाने का ठिकाना भी नहीं था, पर इन सबको भूल इशरत के मन पर कुछ अनहोनी-सी हावी होती जा रही थी. वह बदहवास-सी पीजीआई के बाहर ही रात को लेटी रही, कभी पार्क में तो कभी फुटपाथ पर. उसने रजा को रात 12 बजे फोन किया तो उसने बताया कि तबीयत कुछ ठीक नहीं है, ठंड लग रही है और तेज बुखार भी है. इसके बाद रात 2 बजे बात की तो उसने बताया कि अब कुछ ठीक है, तुम सो जाओ. एक हल्का-सा नींद का झौंका आया और सुबह के 5 बज गए. तुरंत रजा के पास फोन मिलाया, पर उसने फोन नहीं उठाया. फिर मिलाया पर नहीं उठाया. अनहोनी आशंका से दिल बैठता जा रहा था. पर खुद को दिलासा भी दे रही थी कि रात 2 बजे बोल तो रहे थे कि ठीक हूं.

सुबह पता चला रजा की हो चुकी है मौत

इशरत ने रजा को कॉल पर कॉल करती रही, घंटी बजती रही, पर वह जवाब नहीं दे रहा था. ट्रॉमा सेंटर के बाहर गई, पर सिक्योरिटी गार्ड्स ने वहां से भगा दिया. क्योंकि वहां किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी. रिश्तेदारों के फोन आ रहे थे कि कुछ तो बताओ, कैसी है रजा की तबीयत मैं क्या बताती, मुझे खुद ही कुछ नहीं पता था. मेडीकल में बदहवास घूमती रही तो कंट्रोल रूम का नम्बर मिला, उनसे पूछा कि कैसी है मेरे पति की तबीयत, पर कोई जवाब नहीं मिला. 19 मई को दोपहर तकरीबन 2 बजे एक फोन आता है कि आप रजा की पत्नी हो क्या. जब मैंने बताया कि हां, तो उधर से जवाब आया कि आप कहां है. थोड़ी देर बाद मुझे सी-ब्लॉक में ले गए और मुझे बताया कि आपके पति की मौत हो गई.

अंतिम बार चेहरा देखना भी नहीं हुआ नसीब

मैंने पूछा कब तो बोले, सुबह सवा 10 बजे के आसपास. ऐसे कैसे हो सकता है, मैं सुबह 5 बजे से बार-बार फोन कर रही, कोई फोन नहीं उठा रहा, अब आप बता रहे हैं कि उसकी मौत हो गई. मुझे सी-ब्लॉक में ही दाखिल कर लिया गया और मेरे पति के शव को दफनाने के लिए खोखराकोट के कब्रिस्तान में ले गए. मेरी एक गुजारिश थी कि एक बार रजा का चेहरा तो देख लेने दो, पर वह भी नसीब नहीं हुआ.

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने

हालांकि मौहम्मद रजा की कोरोना पॉजीटिव रिपोर्ट 18 मई को आ गई थी, लेकिन गुरूग्राम प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही देखिए, उसने रजा के बच्चों और सम्पर्क में आने वाले लोगों के सैंपल तक नहीं लिए. परिवार को सूचित भी नहीं किया कि आप खुद को क्वारंटाइन कर लें. आसपास के लोगों की जान भी खतरे में डाल दी.

इशरत की रिपोर्ट भी कोरोना पॉजिटिव

19 मई को रजा सुपुर्द-ए-खाक हो चुके थे, उनकी बीबी को सी-ब्लॉक में दाखिल कर उनकी कोरोना जांच की. 20 मई को इशरत की रिपोर्ट आई तो वह भी कोरोना पॉजीटिव मिली. वो मिन्नतें करती रही कि उसके बच्चों का टेस्ट कराया जाए, पर सुनने वाला कोई नहीं था. उसकी कराह पीजीआई की दीवारों से टकराकर खुद उसके जहन में उतर जाती. रजा के पड़ोसी ब्रिजेन्द्र जो उसे गुरूग्राम अस्पताल लेकर गया था और बाद में इशरत को भी रोहतक पीजीआई छोड़कर आया था, वह गुरूग्राम सिविल अस्पताल गया और अपनी जांच कराई.

रजा की मौक के तीसरे दिन बाद खुली स्वास्थ्य विभाग की नींद

रजा के बच्चों की जांच कराने को कहा तो जवाब मिला कि बच्चों को अस्पताल ले आओ. हकीकत ये है कि इशरत और रजा के बच्चें गुरुग्राम के एक फ्लैट में रहते हैं रजा की मौत के तीसरे दिन गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली और उनके बच्चों के सैंपल लिए गए. फिलहाल बच्चे घर में क्वारंटाइन हैं, उनके पास इशरत का बूढ़ा पिता है, जो उनके लिए खाना बनाता है. रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं की कब आएगी. इशरत की देह बेशक अस्पताल की चारदीवारी में बंद है, पर उसकी रूह कभी शौहर की कब्र के दीदार के लिए तरस रही है तो कभी बिलखते मासूम चेहरों के लिए. (ये तथ्य इशरत और ब्रिजेन्द्र से बातचीत पर आधारित)

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