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हरियाणा: रोहतक में कब होगी सेना की रैली भर्ती?, 2 साल से 20 हजार युवा बहा रहे पसीना

रोहतक में सेना की रैली भर्ती कोरोना की वजह से 5 बार कैंसिल हो चुकी है, इससे युवा निराश हो रहे हैं.

रोहतक में सेना की रैली भर्ती कोरोना की वजह से 5 बार कैंसिल हो चुकी है, इससे युवा निराश हो रहे हैं.

Rohtak Army Recruitment News: ARO रोहतक के तहत फिलहाल तकरीबन 20 हजार युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है. भर्ती की तैयारी के लिए हर युवा को हर महीने 10 से 15 हजार रुपये अपनी डाइट और कोचिंग पर खर्च करने पड़ रहे हैं.

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रोहतक. हरियाणा (Haryana) में बार-बार सेना भर्ती रैली स्थगित होने के कारण सेना में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है. अकेले ARO रोहतक (Army Recruitment Rally-Rohtak) में ही तकरीबन 400 करोड़ रुपये (400 Crore) का नुकसान हो चुका है. ये सुनने में जरूर अटपटा लगे, लेकिन ये सच्चाई है. दरअसल बार-बार सेना भर्ती रैली स्थगित होने के चलते युवाओं को यह फटका लगा है. पिछले डेढ़ साल के अंतराल में ARO रोहतक की तरफ से अलग-अलग कारण बताकर 5 बार सेना भर्ती रैली को स्थगित किया जा चुका है.

ARO रोहतक की आखिरी भर्ती फरवरी 2020 में हुई थी, जो कि 2019 में होनी थी. लेकिन हरियाणा में चुनाव की वजह से उस भर्ती रैली को स्थगित कर दिया गया, जो कि बाद में फरवरी 2020 में हुई. ARO रोहतक के तहत पानीपत, सोनीपत, झज्जर और रोहतक जिले के युवाओं की भर्ती होती है. तकरीबन 20 हजार युवाओं ने भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है और पिछले 2 साल से वे लगातार पसीना बहा रहे हैं.

पांच बार स्थगित हो चुकी है ARO रोहतक की भर्ती
फरवरी 2020 के बाद से लगातार पांच बार ARO रोहतक की भर्ती स्थगित हो चुकी है. हर बार वजह कोरोना को बताया जाता है. भर्ती की तैयारी करने वाले युवा हताश हैं, वे हर चौखट पर जाकर इंसाफ की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं. सेना भर्ती कार्यालय जाते हैं तो उन्हें डीसी ऑफिस जाने को कहा जाता है और जब डीसी ऑफिस जाते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि सेना भर्ती से उनका कोई कनेक्शन नहीं है. वे सिर्फ लॉजिस्टिक मुहैया कराते हैं, भर्ती को कैंसिल करना, स्थगित करना या भर्ती करवाना… यह सब भर्ती कार्यालय के काम होते हैं.

तैयारी करने के लिए शहर में भेजते हैं
कहीं से भी संतोषजनक जवाब न मिलने से युवाओं में गुस्सा भी है, लेकिन हताशा भी है. एक-एक पाई जोड़कर मां-बाप उन्हें तैयारी करने के लिए शहर में भेजते हैं, ताकि उनका लाडला सेना में जाकर देश की सेवा करे और साथ-साथ परिवार का भी सहारा बने. लेकिन बार-बार भर्ती कैंसिल होने से परिवारों के सपने भी टूटते नजर आ रहे हैं, क्योंकि अब वे भी अपने लाडलों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं. खेती करने वाले या दिहाड़ी मजदूरी करने वाले के बेटे ही सेना में भर्ती होने के लिए आगे आते हैं.

ARO राेहतक में रजिस्टर्ड हैं 20 हजार अभ्यर्थी
एआरओ रोहतक के तहत फिलहाल तकरीबन 20 हजार युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है. भर्ती की तैयारी के लिए हर युवा को हर महीने 10 से 15 हजार रुपये अपनी डाइट और कोचिंग पर खर्च करने पड़ रहे हैं. आर्मी भर्ती की तैयारी को लेकर पिछले 2 सालों में औसतन हर बच्चे का ढाई से 3 लाख रुपये खर्च आया है. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 20 हजार बच्चों का खर्च कितना हो गया होगा. अगर औसतन प्रति युवा 2 लाख रुपये भी खर्च माना जाए तो 20 हजार युवाओं का 400 करोड़ रुपये खर्च बनता है, जोकि इनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को डांवाडोल करने को काफी है.

इन चार जिलों से सबसे ज्यादा नुकसान
ये आंकड़े सिर्फ चार जिलों रोहतक, सोनीपत, झज्जर और पानीपत के हैं. अमूमन हर जिले में आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं का यही हाल है. सेना भर्ती मुख्यालय की दलील है कि कोरोना के चलते भर्ती को स्थगित किया जाता है. पर ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कोरोनाकाल में देश में चुनाव हो जाते हैं, रैलिया हो जाती हैं और अन्य विभागों की भर्ती उसी तरह से बदस्तूर जारी हैं, जैसे आम दिनों में होती हैं. इसलिए इनके परिवारों की तरफ भी ध्यान दिया जाए और उन्हें इतना मजबूर ना किया जाए कि वह कर्ज के बोझ तले दब जायें.

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