कोरोना ने बदल दी ज़िंदगी! कुश्ती खिलाड़ी नहीं कर पा रहे प्रैक्टिस, अब ऐसे रख रहे हैं खुद को फिट
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कोरोना ने बदल दी ज़िंदगी! कुश्ती खिलाड़ी नहीं कर पा रहे प्रैक्टिस, अब ऐसे रख रहे हैं खुद को फिट
वर्कआउट करते कुश्ती खिलाड़ी

रेसलिंग के कोच (Wrestling Coach) मनदीप के अनुसार कोरोना से पहले और वर्तमान की ट्रेनिंग में दिन-रात का अंतर देखने को मिला है. क्योंकि कुश्ती बॉडी कॉन्टेक्ट गेम है, जिसमें पार्टनर (Partner) को ग्रिप भी करना पड़ता है, गिराना भी पड़ता है, जो कोरोना काल में फिलहाल सम्भव नहीं है

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रोहतक. कोरोना ने आम आदमी की जिंदगी को कुछ ऐसे प्रभावित किया है कि अब उसकी जिंदगी पहले जैसी बिल्कुल नहीं रही. ऐसा ही खिलाड़ियों के साथ भी हुआ है. हम जिक्र कर रहे हैं कुश्ती के खिलाड़ियों का. अभ्यास करने के लिए कोच भी है, मैदान भी है, पार्टनर भी है लेकिन समस्या है तो कोरोना की. कोरोना वायरस ने खिलाड़ियों के अभ्यास पर भी रोक लगा दी है. अब पहले की तरह कुश्ती के खिलाड़ी अभ्यास नहीं करते.

खिलाड़ी अब पहले की तरह कुश्ती का अभ्यास न कर सिर्फ अपने वर्कआउट पर ध्यान दे रहे हैं. खेल जगत में कई खेल ऐसे हैं जिनमें एक खिलाड़ी दूसरे के सम्पर्क में आते हैं और प्रैक्टिस करते हैं. लेकिन, जब से कोरोना ने जिंदगी में दस्तक दी है तब से प्रैक्टिस पहले जैसी नहीं रही. खिलाड़ियों को भी इस बात का डर रहता है कि कहीं कोरोना उन्हें भी अपनी चपेट में ना ले ले.

कुश्ती खिलाड़ी नैना बताती हैं कि जब लॉकडाउन हुआ तो उन्हें सबसे पहले अपने खेल की प्रैक्टिस की फिक्र हुई. लेकिन घर पर रहकर ही उन्होंने कोच का सहारा लेकर सिर्फ वर्कआउट को जारी रखा. प्रैक्टिस न हो पाने का खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा. अनलॉक फेज शुरू होने के बाद भी हालात ज्यों के त्यों हैं. वहीं, 18 साल से कुश्ती खेलने वाले खिलाड़ी भीम ने कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी में कभी ऐसा दौर आएगा. पार्टनर प्रैक्टिस कुश्ती में बेहद जरूरी होती है जो फिलहाल नहीं हो रही.



कैसे करें खिलाड़ी प्रैक्टिस?

कोरोना महामारी की वजह से सभी खेल प्रतियोगिताएं भी रद्द करनी पड़ी हैं, जिसकी वजह से उनका लक्ष्य पूरा नहीं हो सका. उन्होंने जो सपने देखे थे वो हकीकत में न बदलकर बल्कि सपने ही रह गए. वर्तमान में अब सिर्फ 20% ही अभ्यास हो रहा है लेकिन वो भी सिर्फ वर्कआउट. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस महामारी से छुटकारा मिलेगा और पहले की तरह प्रतियोगिताएं हो सकेंगी.

ऐसे करवाई जा रही प्रैक्टिस

वहीं, रेसलिंग के कोच मनदीप के अनुसार कोरोना से पहले और वर्तमान की ट्रेनिंग में दिन-रात का अंतर देखने को मिला है. क्योंकि कुश्ती बॉडी कॉन्टेक्ट गेम है, जिसमें पार्टनर को ग्रिप भी करना पड़ता है, गिराना भी पड़ता है, जो कोरोना काल में फिलहाल सम्भव नहीं है. मनदीप मैदान में अपने खिलाड़ियों का सिर्फ ग्राउंड वर्क, स्ट्रेंथ वर्क, एंडुरेंस वर्क के साथ-साथ रेसलिंग मूवमेंट की टैक्नीक के लिए थैरा बैंड के साथ प्रैक्टिस करवा रहे हैं.

कोच ने कही ये बात

कोच का कहना है कि उनके खिलाड़ियों ने जो प्रतियोगिताओं के लिए लक्ष्य तय किए थे, वो पूरे नहीं हो सके. विशेषकर जिन खिलाड़ियों का किसी एज ग्रुप में आखिरी साल था, उन्हें निराश होना पड़ा है. यही कारण है कि इस कोराना ने खिलाड़ियों की जिंदगी और खेल दोनों पर असर डाला है.
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