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सेना भर्ती: नंगे पैर दौड़ युवाओं ने बनाया रिकॉर्ड, एक बैच में 27 ने लगाई बिना जूतों के दौड़, सभी हुए पास

Dheerendra Chaudhary | News18 Haryana
Updated: February 12, 2020, 7:26 PM IST
सेना भर्ती: नंगे पैर दौड़ युवाओं ने बनाया रिकॉर्ड, एक बैच में 27 ने लगाई बिना जूतों के दौड़, सभी हुए पास
सेना भर्ती में बीना जूते दौड़ रहे युवा

हरियाणा (Haryana) में हो रही सेना भर्ती (Army Recruitment) में आए युवाओं का मानना है कि जूतों की बजाए (Without shoes) नंगे पैर दौड़ेंगे तो तेज भागा जाएगा.

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रोहतक. राजीव गांधी खेल स्टेडियम (Rajiv Gandhi stadium) में चल रही सेना भर्ती के शारीरिक परीक्षण (Physical examination) में युवा अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. इस भर्ती की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है जो हैरान करने वाली हैं. दरअसल भर्ती में आए जो नौजवान बिना जूतों के दौड़ लगा रहे हैं, उनका प्रदर्शन अच्छा देखा जा रहा है. इस दौड़ के नतीजे पर नजर डालें, तो सेना भर्ती के लिए 1600 मीटर की दौड़ में सेलेक्ट होने वाले अधिकतर युवाओं ने नंगे पैर यानी बिना जूतों के ही दौड़ में भाग लिया था.

दरअसल, रोहतक में 10 से 20 फरवरी तक सेना भर्ती का आयोजन किया जा रहा है. इस भर्ती में रोहतक के अलावा पानीपत, सोनीपत और झज्जर जिले के तकरीबन 23 हजार युवा भाग ले रहे हैं. भर्ती प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले शारीरिक परीक्षा होती है. जो इसे पास कर गया, वही अगले दौर में जाएगा. सबसे पहले 1600 मीटर की दौड़ कराई जाती है, जिसे 5 मिनट 45 सेकेंड में पूरा करना होता है.

एक बैच में 27 युवाओं ने बिना जूते लगाई दौड़
जो युवा तय समय में रेस पूरी कर लेते हैं, उन्हें अगले दौर में प्रवेश दे दिया जाता है और बाकी को बाहर निकाल दिया जाता है. सेना में भर्ती के लिए आए युवाओं को सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ना पड़ रहा है. युवाओं का मानना है कि जूतों की बजाए नंगे पैर दौड़ेंगे तो तेज भागा जाएगा. हुआ भी ऐसा ही, इस बैच में 30 लड़कों को सलेक्शन हुआ, जिन्होंने सबसे पहले दौड़ पूरी की. इनमें से 27 लड़के ऐसे हैं, जिन्होंने बिना जूतों के नंगे पैर दौड़ लगाई थी.

युवाओं ने बताया बिता जूते दौड़ने का राज
जब इनसे इसका राज पूछा तो बताया कि दरअसल वे गांव में प्रैक्टिस करते हैं, वहां पर ऐसा ट्रैक नहीं है. जूते पहनकर दौड़ते हैं तो ट्रैक पर ज्यादा जोर लगता है और स्टेमिना टूटने लगता है. नंगे पैर दौड़ने पर सांस नहीं फूलती और स्पीड भी सही रहती है. एक युवा ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, उसी को ध्यान रखते हुए दौड़ लगाई और तीसरा स्थान हासिल किया. हालांकि काफी युवाओं के सपने भी टूटे, लेकिन कइयों को देश सेवा करने का मौका भी मिला. फिलहाल मेडिकल और लिखित परीक्षा के बाद चयन किया जाएगा.

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First published: February 12, 2020, 10:02 AM IST
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