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    दशहरे पर कोरोना पड़ा भारी, सड़क पर रावण और मेघनाथ के पुतले बेंचने को मजबूर हुये कारीगर

    रावण का पुतला बनाने वाले कलाकारों को इस बार कोई पुतला खरीदने वाला नहीं मिल रहा.
    रावण का पुतला बनाने वाले कलाकारों को इस बार कोई पुतला खरीदने वाला नहीं मिल रहा.

    कोरोना महामारी (Corona epidemic) का असर दशहरे पर साफ देखा जा सकता है. इस बार रावण (Ravana) के पुतले बनाने वाले कारीगरों (Artisans) से कोई पुतले खरीदने नहीं आ रहा है. इसलिए पुतलों को सड़क पर रखकर बेंच रहे हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 21, 2020, 5:04 PM IST
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    सिरसा. कोरोना (Corona) की मार त्योहारों पर साफ दिखाई पड़ रही है. इस साल के दशहरे पर कोरोना महामारी (Corona Epidemic) की मार साफ दिखाई दे रही है. इस बार पिछले साल के जैसा दशहरा नहीं मनाया जाएगा. भीड़ भी नहीं जुटेगी. इस रावण (Ravan) और मेघनाथ (Meghnath) के पुतले भी बाजार से कोई नहीं खरीद रहा है. रामलीला के समापन पर रावण मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, लेकिन इस बार सब कुछ फीका है, पुतले बनाने वाले कारीगर का कहना है कि इस बार पुतलों की डिमांड भी नहीं है. अब तक 7 आर्डर मिले हैं वो भी छोटे-छोटे पुतले बनाने हैं.

    इस साल कोरोना के चलते रामलीला का मंचन भी कम ही जगहों पर हो रहा है. इसके साथ ही इस बार दशहरे पर होने वाला कार्यक्रम भी फीका रहने वाला है. इसका सीधा असर दशहरे पर पुतले बनाने वाले कारीगरों पर पड़ रहा है. इस बार कारीगर सड़क पर पुतलों को डिसप्ले कर उनकी एड कर रहे हैं ताकि आने जाने वाले राहगीरों को पता लग सके कि यहां दशहरा के पुतले बनाये जाते हैं.

    पुतले बनाने वाले कारीगर रवि भगत का कहना है कि कोरोना के चलते उनके व्यापार पर भी काफी असर पड़ा है. पिछले दशहरे पर उन्होंने करीब 35 पुतले बनाये थे, लेकिन इस बार 7 पुतले बनाये हैं, वो भी छोटे छोटे है. इस बार बड़े पुतले का आर्डर तक नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि अब उन्हें उम्मीद नहीं है कि कोई बड़ा आर्डर मिलेगा.
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