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बेबी कॉर्न की खेती से हरियाणा के किसान की बदली तकदीर, कम मेहनत में दोगुनी आमदनी

बेबी कॉर्न की खेती कर किसान कर रहा अच्छी कमाई
बेबी कॉर्न की खेती कर किसान कर रहा अच्छी कमाई

किसान बेबी कॉर्न (Baby Corn) की खेती के जरिए आज धान, कॉटन, गेहूं की फसलों के मुकाबले कई गुणा मुनाफा कमा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 5:37 PM IST
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सिरसा. परंपरागत खेती से हटकर हरियाणा के किसानों ने अनुबंध खेती और ओपन मंडी का लाभ लेते हुए न केवल खेती में नए प्रयोग किए हैं, बल्कि मुनाफा भी अधिक कमाया है. इसी तरह के प्रयोगधर्मी किसान हैं सिरसा (Sirsa) जिला के गांव रसूलपुर के किसान हरनेक सिंह. हरनेक सिंह इन दिनों धान, गेहूं की खेती छोड़कर बेबी कॉर्न (Baby Corn) की खेती कर रहे हैं. बेबी कॉन की खेती के जरिए आज धान, कॉटन, गेहूं की फसलों के मुकाबले कई गुणा मुनाफा कमा रहे हैं.

खास बात यह है कि इस साल उन्होंने एक एकड़ में बेबी कॉर्न फसल बोई और 12 क्विंटल फसल का उत्पादन हुआ. दिल्ली में प्राइवेट ट्रेडर्स को 12,800 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से फसल बेची. वे पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं। पूरा परिवार तो खेतीबाड़ी करता ही है, उनकी ओर से की जा रही बहुद्देश्यीय खेती के कारण सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है.





दरअसल हरियाणा में गेहूं, धान, नरमा, सरसों, बाजरा फसलों के मोहपाश में किसान बंधे हुए हैं. हालांकि हरियाणा के उद्यान विभाग की ओर से किन्नू, अमरुद, अंगूर के अलावा फूलों, मशरूम, मसालों व सब्जियों की खेती के लिए 20 से 30 फीसदी अनुदान दिया जाता है. विभाग की ओर से कोल्ड स्टोरेज के अलावा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर भी अनुदान दिया जाता है. बावजूद किसान जैविक खेती नहीं अपना रहे हैं. इन सबके बीच कुछ किसान आज फसल विविधिकरण अपनाकर ओपन मार्कीट में अपनी फसल बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं.
हरनेक सिंह ने बताया कि बेबी कॉर्न प्रोटीन युक्त होता है. थ्री स्टार व फाइव स्टार होटल-रेस्तरां में इसकी डिमांड है. इसकी कीमत करीब 128 रुपए किलो है. एक एकड़ में 12 क्विंटल फसल हुई है. करीब 1 लाख 40 हजार रुपए की. उनके अनुसार अभी बेबी कॉन की हार्वेस्टिंग का सारा काम मैन्यूल है. ऐसे में इससे उनके खेत में अनेक लोगों को रोजगार भी मिलता है और उन्हें गेहूं व धान की फसल से अधिक मुनाफा मिलता है. विशेष बात यह है कि बेबी कॉन की फसल सवा से अढ़ाई माह में तैयार हो जाती है. ऐसे में किसान साल में तीन बार इसे बो सकता है.
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