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सिरसा: माता-पिता ने छोड़ा तो मौसी ने दिया सहारा, बेटी ने गोल्ड जीत किया नाम रोशन
Sirsa News in Hindi

Nakul Jasuja | News18 Haryana
Updated: January 22, 2020, 1:31 PM IST
सिरसा: माता-पिता ने छोड़ा तो मौसी ने दिया सहारा, बेटी ने गोल्ड जीत किया नाम रोशन
महिला ने बेटियों को बोझ समझने वालों को दी मात, पैदा की एक मिसाल

अनामिका की मौसी वीरपाल कौर ने अपनी सोने की चेन (Gold Chain) बैंक में गिरवी रख कर लोन लिया. उन्हें उम्मीद थी कि अनामिका बेहतर प्रदर्शन करेगी. हुआ भी ऐसा ही, नेपाल में हुए अंडर-17 प्रतियोगिता में उसने बेहतर प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल (Gold Medal) अपने नाम किया

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सिरसा. हरियाणा (Haryana) के डबवाली में एक महिला ने मां-बाप से बिछड़ी दो बेटियों को गोद लेकर मानवता की वो मिसाल पेश की है जिससे बेटियों को बोझ समझने वालों के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. डबवाली के दिवानखेड़ा गांव की रहने वाली अनामिका के माता-पिता घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के कारण अलग हो गए थे. मां ने दूसरा घर बसा लिया था तो पिता ने बेटे को अपनाते हुए दोनों बेटियों को बेसहारा छोड़ दिया था. संकट की इस घड़ी में दोनों बच्चियों के लिए उनकी मौसी वीरपाल कौर सहारा बनी. उन्होंने सामने आकर दोनों बच्चियों को अपना लिया.

नेपाल में बीते तीन से लेकर सात जनवरी तक हुए यूथ गेम्स इंटरनेशनल प्रो-लीग चैंपियनशिप में योग स्पर्धा में अनामिका ने गोल्ड जीता है. इस उपलब्धि के बाद गांव पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया. दरअसल, अनामिका के माता-पिता घरेलू हिंसा के कारण अलग-अलग हो गए थे. तब दोनों बच्चियों की मदद के लिए उनकी मौसी वीरपाल कौर सामने आईं और उन्होंने उनकी परवरिश का जिम्मा संभाला.

मौसी ने सोने की चेन गिरवी रख उठाया लोन

अनामिका को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए नेपाल जाने के लिए 22 हजार रुपये की जरूरत थी. तब मौसी ने अपनी सोने की चेन बैंक में गिरवी रख उस पर लोन लिया. उन्हें उम्मीद थी कि अनामिका यहां बेहतर प्रदर्शन करेगी. हुआ भी ऐसा ही, अंडर-17 मुकाबले में अनामिका ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. जीत के बाद दिवानखेड़ा लौटने पर अनामिका ने अपनी मौसी के गले में पहनाकर उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार किया.

गोल्ड मेडल जीतने के बाद अनामिका अपनी मौसी के साथ


छठी कक्षा से हुई सफर की शुरुआत

अनामिका के इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत छठी कक्षा में हुई. वो सावंतखेड़ा स्कूल में पढ़ती थी, यहां पीटीआई अनिल कुमार ने उसे योग के गुर सिखाए. अपनी प्रतिभा के दम पर अनामिका पहली दफा करनाल में हुए राज्य स्तरीय गेम्स में पहुंची. सातवीं में जिला स्तर पर खेली, राज्य स्तर पर उसका सेलेक्शन हुआ, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण वो राज्य स्तर पर नहीं जा सकी. नौवीं में महेंद्रगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय मुकाबलों में उसने हिस्सा लिया. वर्ष 2019 में भिवानी में राज्य स्तरीय मुकाबले खेले तो उसका चयन नेशनल लेवल पर हुआ. गोवा में अच्छे प्रदर्शन की बदौलत अनामिका अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुई थी.
मौसी ने माता-पिता द्वारा बेसहारा छोड़ने पर अपनी दोनों भांजियों को अपनाया


मां-बाप ने छोड़ा, मौसी ने अपनाया

वहीं गोल्ड मेडल विजेता खिलाड़ी अनामिका ने बताया कि वो खुइयांमलकाना गांव स्थित सरकारी स्कूल में नौवीं कक्षा की छात्रा है. उसने बताया कि उसके लिए मौसी ही सब कुछ है. हम इन्हें ही मां कहकर पुकारती हैं. राज्य स्तर पर जाने के लिए मुझे पांच हजार रुपये की जरूरत थी तो मौसी ने अपने सोने का लॉकेट गिरवी रखकर बैंक से लोन उठाया था. इस बार भी उन्होंने ऐसा किया. वो मुझे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं. जब मुझे नेपाल जाना था मौसी ने फिर गरीबी के चलते अपने गहने गिरवी रख कर मुझे 22 हजार देकर यूथ गेम्स अंतराष्ट्रीय प्रो लीग में भेजा, जहां मैंने बेहतरीन प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीता. वो हमेशा मुझमें उत्साह पैदा करती हैं.

जेवरात गिरवी रख भेजा नेपाल

वहीं अनामिका की मौसी वीरपाल कौर ने बताया कि ये दोनों (अनामिका और उसकी बहन) उसकी गोद ली हुई बेटियां है. जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी योगा में कुछ कर सकती है तो उन्होंने अपने जेवरात गिरवी रख कर उसे नेपाल भेजा. चूंकि उनकी अपनी कोई औलाद नहीं थी, इसलिए उन्होंने मां-बाप से बिछड़ी इन दोनों बच्चियों की परवरिश का जिम्मा उठाया था, ये दोनों काफी प्रतिभावान हैं. उन्होंने कहा कि वो घर पर सिलाई का कार्य कर कमाई या फिर विधवा पेंशन खर्च कर दोनों को पढ़ा-लिखा रही हैं. इस बार अनामिका को नेपाल जाना था तो उसकी खुशी के लिए मैंने सोने के जेवरात गिरवी रख दिए.

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First published: January 22, 2020, 12:11 PM IST
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