ई-रिक्शा चलाती है पैरालाइज्ड सविता, बोलीं- अजीब तरीके से देखते हैं लोग, फर्क नहीं पड़ता, बच्चों का भविष्य सुधारना है

2017 में एक्सीडेंट होने के बाद सविता हुई पैरालाइज्ड.

Story of Female E Rickshaw Driver: ससुराल और मायके से अलग रहकर ई रिक्शा चला गुजारा कर रही सविता. सविता ने हरियाणा सरकार से बेटियों को पढ़ाने में मदद करने की मांग की.

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सिरसा. इंसान सपने देखता है, लेकिन समय की करवट के आगे उसके सपनों का वजूद नहीं रहता. वक्त बदलता है तो परिस्थितियों के आगे इंसान को अपने सपने भूलने पड़ते हैं. पेट पालने के लिए जुट जाना पड़ता है. सिरसा की सविता के भी सपने बड़े थे (Savita also had big dreams). लेकिन जीवन में आये संकट का सामना करने के लिए उसे ई रिक्शा चलाना पड़ रहा है. ई रिक्शा चला कर अपने बच्चों की परवरिश कर रही सविता सिरसा की एक मात्र महिला ई रिक्शा चालक (Sirsa's only female e-rickshaw driver) है.

मां-बाप ने सविता की शादी की. जिसके बाद ससुराल वालों की मारपीट सहन नहीं कर पाई और अपनी 2 बेटियों व एक बेटे को लेकर बहादुरगढ़ चली गई. किसी तरह उसने वहां अपना गुजर बसर किया. लेकिन समय के थपेड़ों ने सविता को वहां भी नही बक्शा. कोरोना से लगे लॉक डाउन के कारण सब बन्द हो गया. जिससे उसका काम भी बन्द हो गया.  बहादुरगढ़ छोड़ वापिस 20 साल बाद जब सिरसा लौटी तो मां-बाप ने भी स्वीकार नहीं किया. जिसके बाद आज सविता ई-रिक्शा चलाकर अपना घर चला रही है.

साल 2017 में सविता का एक्सीडेंट हुआ जिसके बाद सविता पैरालाइज्ड है. सविता की 2 बेटियां हैं व 1 बेटा है. सविता की 1 बेटी नोवीं कक्षा में है व दूसरी लड़की ग्रेजुएट है. सविता ई रिक्शा चलाकर अपने बच्चों की पढ़ाई व घर दोनों चला रही है.  सविता ने बताया कि घर में मेरे पिता हैं, भाई हैं, लेकिन मेरे साथ कोई भी खड़ा नही है. जिस कारण ई रिक्शा चला रही हूं.

सविता ने बताया कि ससुराल वालों की प्रताड़ना सहन नहीं हुई जिसके बाद मैं बहादुरगढ़ अपने बच्चों को लेकर चली गई. बहादुरगढ़ में मेरा कोई अपना नही था. जैसे तैसे करके मैंने मेरी बेटियों के नाम से टिफ़िन का काम शुरू किया. लेकिन लॉकडाउन के कारण वो भी बन्द हो गया. सविता ने बताया कि थोड़े समय बाद जब किसान आंदोलन शुरू हुआ तो सिरसा से कुछ लोग बहादुरगढ़ आए. उन्होंने मुझसे पूछा के आप कहां से हो. सविता ने बताया कि किसानों द्वारा अखबार में मेरे बारे में लिखा गया. जिसके बाद मेरे परिवार वालों को पता चला कि मैं बहादुरगढ़ में हूं. उसके बाद भी वो लोग मुझसे मिलने नहीं आए. जिसके बाद मैं खुद ही अपने बच्चों को लेकर सिरसा आ गई.

सवारियों के व्यवहार को लेकर सविता ने बताया कि लोग बहुत ही अजीब तरीके से देखते हैं कि एक औरत रिक्शा चला रही है. लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि मुझे मेरे बच्चों का भविष्य सुधारना है. सविता ने बताया कि भीख मांगने से बढ़िया तो मेहनत करती हूं. सविता ने कहा कि दूसरे ई-रिक्शा चालक भी मेरा बहुत सहयोग करते हैं. मैं जहां कहीं से भी सवारी लूं तो कोई मुझे रोकता नहीं है.

अन्य ई-रिक्शा चालक सविता का उत्साहवर्धन करते हैं. उनका कहना है कि  अच्छा लगता है की एक महिला ई-रिक्शा चला रही है और अपने बच्चों का पेट भर रही है. उन्होंने बताया की सविता केवल सिरसा में एक ही महिला ई-रिक्शा चालक है. उन्होंने बताया की सविता के इस जज्बे से हमें भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है. इंसान को परिस्थितियों के आगे कभी हारना नहीं चाहिए बल्कि लड़ना चाहिए. ई-रिक्शा चालकों ने बताया की हमारी तरफ से सविता के लिए जो भी सहयोग रहेगा हम जरूर करेंगे. सविता ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि सरकार द्वारा उसकी बेटियों को पढ़ाने में उसकी मदद की जाए व उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए.

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