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नहीं बना पक्का पुल, नाराज ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का फैसला

Nakul Jasuja | News18 Haryana
Updated: October 15, 2019, 12:09 PM IST
नहीं बना पक्का पुल, नाराज ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का फैसला
पक्का पुल नहीं बनने से नाराज ग्रामीणों ने लिया ये फैसला

सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ के लोगों की वर्षों पुरानी मांग घग्गर नदी पर पुल बनाया जाना आश्वासनों के झमेले में उलझ कर रह गया है.

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सिरसा. गांव कुत्ताबढ़ में ग्रामीणों ने गांव में पक्का पुल नहीं बनने से नाराज होकर विधानसभा चुनाव (Assembly election) का बहिष्कार करने का फैसला किया है. कुत्ताबढ़ गांव सिरसा (Sirsa) जिले के ऐलनाबाद (Elnabad) हलके में आता है जहां के विधायक इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला (Abhay Singh Chautala) है. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 30 सालों से किसी भी नेता ने गांव में पक्का पुल बनाने की कोई सुध नहीं ली जिसकारण किसी भी नेता को उनके गांव का कोई भी व्यक्ति वोट नहीं डालेगा.

बता दें कि गांव कुत्ताबढ़ के लोगों की वर्षों पुरानी मांग घग्गर नदी पर पुल बनाया जाना आश्वासनों के झमेले में उलझ कर रह गया है. लगभग तीन दशकों से सत्ता में आने वाली हर सरकार के समक्ष कुत्ताबढ़ के ग्रामीणों ने फल्डी नहर पर पुल बनाए जाने की गुहार लगाई, लेकिन आश्वासनों का झुनझुना थमाए जाने के सिवाय आज तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी मिला था आश्वासन

ग्रामीणों ने इससे पहले भी लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन ही चुनाव का बहिष्कार कर वोटिंग बंद करवा दी थी, लेकिन सिरसा के उपायुक्त प्रभजोत सिंह और उस समय की भाजपा उम्मीदवार सुनीता दुग्गल ने गांव में पहुंचकर लोगों को आश्वस्त किया था कि आचार संहिता हटते ही सर्वप्रथम इस पुल का निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा. जिसके उपरांत गांव वासियों ने उच्चाधिकारियों व सांसद सुनीता दुग्गल पर विश्वास जताते हुए मतदान आरंभ किया था.

30 सालों से है ग्रामीणों की ये मांग

चुनाव के नतीजे आए ओर सुनीता दुग्गल सांसद बन गई जिसे काफी लंबा समय बीत जाने के उपरांत भी उन्होंने गांव वासियों की मुख्य मांग व समस्या की ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया और प्रशासन द्वारा किए गए वायदे पर किसी ने कोई गौर नहीं किया. ग्रामीणों ने कहा कि गांव में पक्का पुल बनाने की मांग वे पिछले 30 सालो से कर रहे है लेकिन अभी तक किसी भी नेता ने उनकी सुध नहीं ली जिसकारण उनकी समस्या ज्यो की त्यों है.

ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का फैसला
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उन्होंने कहा कि इस कच्चे पुल पर वाहन चलाना काफी रिस्क भरा है कभी भी कोई हादसा हो सकता है. उन्होंने कहा कि गांव में पक्का पुल बनाने की मांग कई बार नेताओ के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों से कर चुके है लेकिन अभी तक उनके गांव में पुल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने इस बार विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है. ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना इसी मार्ग से आवागमन करते हैं जहां पर पुल की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को रोजाना मौत के मुंह से गुजरना पड़ रहा है.

बरसाती सीजन में बढ़ता है जलस्तर

इसके अलावा घग्गर नदी में बरसाती सीजन में पानी का जलस्तर बढ़ जाता है ओर यह रास्ता बंद हो जाता है जिसके कारण उन्हें वाया ओटू होकर रानियां शहर में पहुंचना पड़ता है जिसके लिए उन्हें 22 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता है. इसमें उन्हें समय व आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. ग्रामीणों ने कहा कि पुल के माध्यम से रानियां शहर का सीधा संपर्क काफी नजदीक पड़ता है.

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First published: October 15, 2019, 12:09 PM IST
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