छह साल, 8111 घोषणाएं, सिर्फ 4398 हुईं पूरी, ये है मनोहरलाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड
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छह साल, 8111 घोषणाएं, सिर्फ 4398 हुईं पूरी, ये है मनोहरलाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड
सीएम मनोहरलाल ने अपनी घोषणाओं की समीक्षा की

व्यवहारिक ही नहीं थीं मुख्यमंत्री की 315 घोषणाएं, 1032 ऐलान पर अभी भी लंबित है काम, सीएम मनोहरलाल ने तेजी लाने के दिए निर्देश

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  • Last Updated: August 12, 2020, 1:10 PM IST
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चंडीगढ़. साल 2014 में संघ कार्यकर्ता से सीधे सीएम बने मनोहरलाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) का एक रिपोर्ट कार्ड आया है. मुख्यमंत्री ने खुद अपनी घोषणाओं से संबंधित मामलों की समीक्षा की. इसमें पता चला कि 315 घोषणाएं तो व्यवहारिक ही नहीं थीं. मुख्यमंत्री घोषणाओं (Chief Minister Announcement) के मॉनिटरिंग एवं क्रियान्वयन अधिकारी टीसी गुप्ता ने बताया कि 2014-20 के बीच कुल 8111 मुख्यमंत्री घोषणाएं हुई थीं, जिनमें से 4398 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं. 2388 पर कार्य प्रगति पर है. जबकि 1032 घोषणाएं अभी लंबित हैं.

गुप्ता ने बताया कि कृषि विभाग (Agriculture Department) से संबंधित 95 प्रतिशत घोषणाएं पूरी हुई हैं. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 93 प्रतिशत व स्वास्थ्य विभाग की 77.7 प्रतिशत पूरी हुई हैं. स्कूल शिक्षा, परिवहन, बिजली, लोक निर्माण, विकास एवं पंचायत, शहरी स्थानीय निकाय से जुड़ी घोषणाओं के काम को भी समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा.

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की घोषणाओं की व्यवहार्यता संबंधी जानकारी तुरंत दें. ऐसी घोषणाओं की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही निविदाएं आमंत्रित की जाएं और इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाए.



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कृषि विभाग से संबंधित 95 प्रतिशत घोषणाएं पूरी

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सीएम ने स्पष्ट किया कि घोषणा के बाद जब योजनाओं का काम शुरू हो जाता है, तो प्रशासनिक सचिव फील्ड में जाकर कार्य प्रगति की समीक्षा करें. इस बारे स्थानीय जन प्रतिनिधियों को भी सूचित किया जाए.

मनोहरलाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रेलवे (Railway) से जुड़ी परियोजनाओं को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं में शामिल किया है, इसलिए नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत इनके लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है.

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जिन परियोजनाओं के लिए 70 प्रतिशत भूमि उपलब्ध हो जाती है, वहां पर भूमि का अधिग्रहण किया जाए और शेष 30 प्रतिशत उसके आसपास अधिग्रहित की जाए ताकि इसे भविष्य में निजी भूमि से बदला जा सके. इसका मुख्य लक्ष्य इन्फ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाओं को पूरा करवाना है.
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