सोनीपत में दो पुलिसकर्मियों की हत्या: मरने से पहले जांबाज सिपाही ने हाथ पर लिखा कार का नंबर, हत्यारों तक पहुंच गई पुलिस
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सोनीपत में दो पुलिसकर्मियों की हत्या: मरने से पहले जांबाज सिपाही ने हाथ पर लिखा कार का नंबर, हत्यारों तक पहुंच गई पुलिस
मरने से पहले सिपाही ने हाथ में लिखा बदमाशों की कार का नंबर

Murder Mystery: पोस्टमार्टम के दौरान जब चिकित्सकों को हाथ पर लिखा नंबर नजर आया तो पुलिस ने तत्काल उसके आधार पर कार्रवाई शुरू की.

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सोनीपत. जिले के गोहाना में बुटाना पुलिस चौकी से गश्त पर निकले एसपीओ कप्तान और सिपाही रविंद्र से बदमाशों का शराब पीने को लेकर विवाद हुआ था. दरअसल, बदमाश रास्ते में शराब पी रहे थे और पुलिस द्वारा टोकने पर यह विवाद हुआ. डंडा लेकर निकले दोनों सिपाहियों पर धारदार हथियारों से लैस बदमाशों ने हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया, लेकिन मरने से पहले जांबाज सिपाही रविंद्र ने समझदारी दिखाते हुए सुनसान जगह पर खड़ी कार का नंबर अपने हाथ पर लिख लिया था. पोस्टमार्टम के दौरान जब चिकित्सकों को हाथ पर लिखा नंबर नजर आया तो पुलिस ने तत्काल उसके आधार पर कार्रवाई शुरू की.

एसपीओ व सिपाही की हत्या के बाद से ही पुलिस की विभिन्न शाखाएं सक्रिय होकर आरोपितों का पता लगाने की कोशिश में जुट गई थीं. पोस्टमार्टम के दौरान सिपाही रविंद्र के हाथ पर पेन से एचआर-56बी 8192 नंबर लिखा नजर आया. पुलिस ने कार का नंबर मिलते ही रिकॉर्ड खंगाला तो इस नंबर पर एक ग्रैंड आई-10 कार का मिला, जो जींद निवासी गुरमीत के नाम पर पंजीकृत थी.

पुलिस मुठभेड़ में मारा गया एक हत्यारा
पुलिस गुरमीत के घर तक पहुंची तो पता चला कि उन्होंने कुछ समय पहले ही यह कार संदीप को बेच दी थी, लेकिन अभी तक कागजात ट्रांसफर नहीं कराए थे. उससे पता लेकर पुलिस संदीप और उसके साथी अमित व विकास तक जा पहुंची, जहां मुठभेड़ के दौरान अमित मारा गया जबकि संदीप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और विकास भागने में कामयाब हो गया.
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सोनीपत में दो पुलिकर्मियों की बेरहमी से हत्या




रविंद के हाथ में लिखे नंबर ने सुलझाई मौत की गुत्थी
इसके अलावा साइबर सेल की मदद से रात को उस क्षेत्र में एक्टिव मोबाइल नंबर की जांच-पड़ताल से स्पष्ट हुआ था कि उस क्षेत्र में संदीप, अमित व उसके साथियों के मोबाइल नंबर एक्टिव थे. यही नहीं क्षेत्र कुछ सीसीटीवी फुटेज में भी यह कार नजर आने की बात कही जा रही है. बरोदा थाना के एसएचओ बदन सिंह ने कहा कि इस तरह के मामलों में विभाग की सभी टीमें मिल कर काम करती हैं. पुलिस पहले से ही वैज्ञानिक तरीके मामले की जांच कर रही थी. रविंद्र के हाथ पर मिला कार का नंबर भी इसमें काफी मददगार साबित हुआ.
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