महंगाई में लाल हुआ टमाटर तो गोभी के भी बढ़े भाव, किचन का बिगड़ा बजट
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महंगाई में लाल हुआ टमाटर तो गोभी के भी बढ़े भाव, किचन का बिगड़ा बजट
सब्जियों का दाम बढ़ने से दुकानदार भी परेशान है.

दुकानदारों के मुताबिक, पहले 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर (Tomato) 60 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाला बैंगन अब 40 तक पहुंच गया है.

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गोहाना. कोरोना वायरस (COVID-19) के डर से एक ओर जहां हरी सब्जियों का दाम आसमान छूने लगा हैं, वहीं दूसरी ओर दुकानदारों को खरीदार नहीं मिलने से हर रोज हजारों का नुकसान झेलना पड़ा रहा है. इस वजह से दुकानदार बची हुई सब्जियों को सड़क पर फेंकने पर मजबूर हो रहे हैं. वहीं दूसरे प्रदेशों से आने वाली सब्जियों की आमद कम (Vegetable Price) होने से आढ़ती भी परेशान हैं. कुछ सब्जियां ऐसी हैं जिन्हें लोगों को दाम बढ़ने के बावजूद भी खरीदने को विवश होना पड़ रहा है, क्योंकि बिना सब्जी भोजन खाना मुश्किल है.

सब्जियों का दाम अचानक बढ़ने से रसोई भी महंगाई की शिकार हो चुकी है. इससे गृहणियां विशेष रूप से परेशान हैं. सब्जियों पर महंगाई की मार से छोटे सब्जी दुकानदार सकते में हैं. गोहाना की सब्जी मंडी में काम करने वाले छोटे दुकानदारों की मानें तो पिछले कई दिनों से लगातार सब्जियों के भाव में बढ़ोतरी हो रही है. इसके चलते सभी सब्जियों के दाम बढ़ते जा रहे हैं. दूसरे राज्य में सब्जी का उत्पादन कम होने से भाव बढ़ते जा रहे है.

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एक नजर दाम पर
पहले 20 रुपए प्रति किलो बिकने वाला टमाटर 60 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है. 15 रुपए प्रति किलो बैंगन से अब 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया. इसी तरहे 10 रुपए से 30 रुपए भिंडी ,30 रुपए से 70 रुपए शिमला मिर्च ,20 रुपए से 100 रुपए प्रति किलो फूल घोभी पहुंच गई है . मटर 50 रुपए से 120 रुपए , 120 रुपए लहसुन से 160 रुपए पहुंच गया है जिस के चलते सब्जी खरीदना और बेचना घाटे का सौदा होता जा रहा है. दुकानदारों की मानें तो हर रोज वो पांच से सात हजार की सब्जिया बड़े दुकानदारों से खरीदकर बेचते है, लेकिन भाव लगातार बढ़ने से न तो हर रोज सब्जियां बिक रही  है और बढ़ते सब्जियों के दाम से खरीदार भी सब्जियां कम खरीद रहे हैं. इस के चलते उन्हें हर रोज हजारों का नुकसान हो रहा है. शाम को बचने वाली सब्जियां ख़राब होने से उसे फेकना पड़ता है. सब्जी खरीदने आए खरीदार भी हर रोज के सब्जियों के बढ़ते भाव से परेशान हैं. उनकी रसोई का बजट बिगता जा रहा है. इसके चलते पहले जो लोग सब्जियां एक किलो तक ले जाते थे अब वो सिर्फ पाव भर सब्जी से काम चला रहे हैं.
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