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देसी जुगाड़ से किसान ने तैयार कर दी मशीन, धान की फसल झाड़ने के आएगी काम

Sunil Jindal | News18 Haryana
Updated: November 15, 2019, 5:33 PM IST
देसी जुगाड़ से किसान ने तैयार कर दी मशीन, धान की फसल झाड़ने के आएगी काम
देसी जुगाड़ से किसान ने तैयार की ये मशीन

सत्यवान ने एक पुरानी थ्रेसर मशीन को खरीदा. इस मशीन के अंदर के सभी पार्टी निकाल दिए. उसके बाद ऐसे उपकरण तैयार करवाए जिससे धान की फसल की आसानी से झड़ाई हो सके

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सोनीपत. किसानों (Farmers) के सामने धान की फसल की झड़ाई को लेकर अकसर चुनौती बनी रहती है. किसान धान की कटाई व झड़ाई के लिए श्रमिकों (Workers) पर आश्रित रहते हैं. कुछ अरसे से श्रमिकों की कमी बनी हुई है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है. गोहाना (Gohana) के गांव सैनीपुरा के रहने वाले किसान सत्यवान ने इसी परेशानी का हल निकालने के लिए उसने देसी जुगाड़ से धान की फसल झाडऩे की मशीन ही तैयार कर दी है.

इस मशीन से जहां धान की फसल आसानी से झड़ जाती है, वहीं पूरी पराली अलग निकल जाती है. इस मशीन के इस्तेमाल करने के बाद किसानों को अपने खेतो में पराली जलाने की जरुरत नहीं पड़ेगी. किसान सत्यवान इस मशीन को और आधुनिक बनाना चाहता है, जिसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहा है.

किसान सत्यवान ने बताया उनके पास खुद की चार एकड़ जमीन है. करीब आठ साल पहले उसने मेकेनिक का काम छोड़ कर खेती करनी शुरू कर दी. उसने अपने खेत में 2012 में पहली बार धान की फसल लगाई. उस समय फसल पकने के बाद कटाई व झड़ाई के लिए श्रमिक मिल गए थे. 2014 में धान लगाया तो उसे फसल की कटाई तो करवा ली लेकिन झड़ाई के लिए श्रमिक नहीं मिले. तब उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था.

किसान सत्यवान


उसने उसी समय धान की झड़ाई के लिए मशीन बनाने की ठान ली थी. सत्यवान ने उस समय एक छोटी मशीन बनाई जिसे बिजली की मोटर से चला कर धान की झड़ाई की. उस मशीन से धान की फसल ठीक से नहीं झड़ पाई, लेकिन उसका जुनून कम नहीं हुआ. उसने बड़ी मशीन बनाने की अपनी कोशिश जारी रखी.

पहले पुरानी थ्रेसर मशीन को खरीदा

सत्यवान ने एक पुरानी थ्रेसर मशीन को खरीदा. इस मशीन के अंदर के सभी पार्टी निकाल दिए. उसके बाद ऐसे उपकरण तैयार करवाए जिससे धान की फसल की आसानी से झड़ाई हो सके. लगातार चार साल के संघर्ष के बाद उसे अब जाकर कामयाबी मिली है. सत्यवान ने ऐसी मशीन को तैयार किया है जिससे धान की कटी हुई फसल की आसानी से झड़ाई हो सकती है. खास बात यह है कि हाथ से फसल की झड़ाई की तुलना में इस मशीन में बहुत कम समय तो लगता ही है साथ में श्रमिकों की भी कम जरूरत पड़ती है.
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चार लाख रुपये तक आया खर्चा

सामान्य तौर पर एक एकड़ की धान की कटी फसल को आठ-दस श्रमिक करीब तीन घंटे में झाड़ते हैं लेकिन इस मशीन से तीन मजदूरों की सहायता से एक एकड़ की फसल की झड़ाई एक घंटे में हो जाती है. मशीन धान को झाड़ कर पराली अलग कर देती है. किसान के अनुसार वह इस मशीन पर अब तक करीब चार लाख रुपये खर्च कर चुका है. मशीन को आधुनिक रूप देने के लिए इतने ही पैसे और खर्च होंगे.

अभी जारी है मशीन पर काम

जब यह मशीन पूरी तरफ से तैयार हो जाएगी तब इससे झड़ाई के साथ ही पराली की कटाई भी हो सकेगी. सत्यवान लगातार इसको लेकर लगातार प्रयास करता आ रहा है और इसे और बेहतर बनाने के लिए सत्यवान ने बैंक में अपनी जमीन को गिरवी रख कर लोन भी लिया है.

पराली को जलाने की समस्या भी होगी दूर

सत्यवान का दावा है की इसे आने वाले समय में किसानों को बहुत फ़ायदा होगा और पराली को जलाने वाली समस्या भी दूर होगी. लेकिन सत्यवान अब सरकार से  इस उम्मीद में है सरकार उसकी कुछ मदद करे ताकि वो इसे और बेहतर बनाकर हरियाणा के इलावा पंजाब और यूपी के किसानो के लिए इस मशीन को तैयार कर सके ताकि किसानो को पराली जलाने की समस्या के साथ साथ श्रमिक की समस्या से ना जूझना पड़े.

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First published: November 15, 2019, 3:42 PM IST
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