संयुक्त किसान मोर्चा से गुरुनाम चढूनी सस्पेंड, चुनावों के दौरान कोई किसान नहीं जाएगा पंजाब

किसान नेताओं ने साफ किया कि वे केवल किसानों के हक की लड़ाई लड रहे हैं चुनाव नहीं. (रॉयटर्स फाइल फोटो)

Haryana News:संयुक्त किसान मोर्चा ने किया ऐलान, 22 जुलाई को 200 किसान करेंगे संसद कूच लेकिन इस दौरान उन्हें जहां पर रोका जाएगा वे वहीं रुक जाएंगे. दिल्ली जाने वाले किसानों के आधार कार्ड व फोटो भी जमा करवाने की अपील की गई.

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सोनीपत. संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए गुरुनाम चढूनी को 7 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया. किसान नेतओं ने कहा कि हमारा काम किसानों के हक में आंदोलन लड़ना है चुनाव लड़ना नहीं और गुरुनाम लगातार राजनीतिक बयानबाजी कर रहे थे. बैठक के दौरान इस बात का निर्णय लिया गया कि ये सही नहीं और इसी के चलते उन्हें सस्पेंड किया गया है. इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने ऐलान किया कि चुनावों के दौरान कोई भी किसान नेता पंजाब नहीं जाएगा बल्कि बॉर्डर पर ही रहकर आंदोलन को मजबूत करेंगे. किसान नेताओं ने घोषणा की कि 22 जुलाई को 200 किसान दिल्ली संसद कूच में शामिल होंगे और इन सभी किसानों का डाटा भी मांग लिया गया है.
वहीं किसान नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड में चल रहे आंदोलन को भी मजबूत किया जाएगा. इसके साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलनों को भी बढ़ाते हुए पूरजोर से अब प्रदर्शन किए जाएंगे.

कोई बयान नहीं दे सकेंगे चढूनी
किसान नेता राज्यपाल ने कहा कि गुरुनाम चढूनी अब सात दिन के लिए सस्पेंड हैं और इस दौरान न तो वे किसी स्टेज पर जाएंगे और न ही कोइ्र बयान देंगे. हमारा मकसद केवल किसानों के हक में आंदोलन करना है न कि कोई चुनाव लड़ना, लेकिन चढूनी लगातार राजनीतिक बयानबाजी कर रहे थे. उन्होंने जानकारी दी कि 22 तारीख को 200 किसान दिल्ली जाएंगे, इस दौरान उन्हें जहां रोका जाएगा वहीं रुक जाएंगे, लेकिन जहां से रास्‍ता मिलेगा वहीं से दिल्ली पहुंचेंगे. दिल्ली जाने वाले सभी किसानों के आधार कार्ड और फोटो अपने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को देने के लिए भी कहा गया है.

नहीं जाएंगे पंजाब
पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने बड़ा फैसला लिया है. चुनाव के दौरान कोई भी किसान नेता पंजाब नही जाएगा. राज्य की सीमाओं पर रहकर आंदोलन को मजबूत करेंगे. इसके साथ ही सांसदों से मिलकर ये अपील की जाएगी कि वे 17 जुलाई को संसद में किसान आंदोलन की बात उठाएं और वॉकआउट करें. लेकिन संसद से बाहर न आए और वहीं रहकर किसानों के मुद्दे पर चर्चा करें.

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