सोनीपत के इस गांव में लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर है रोक

गोहाना में पढ़ने वाली छात्राओं ने पंचायत की फरमान गलत बताते हुए कहा है कि किसी भी पंचायत को कोई हक़ नहीं है कि वह किसी पर रोक लगाए

Sunil Jindal | News18 Haryana
Updated: April 19, 2018, 1:44 PM IST
सोनीपत के इस गांव में लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर है रोक
बैठक करते पंचायत के सदस्य
Sunil Jindal | News18 Haryana
Updated: April 19, 2018, 1:44 PM IST
सोनीपत के गोहाना हलके में एक ऐसा गांव है, जहां पिछले एक साल से लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर पाबंदी है. गांव ईसापुर खेड़ी की पंचायत द्वारा किए गए फैसले पर कई बार मुनादी भी करवाई जा चुकी है. बताया जाता है पंचायत ने यह फैसला गांव में एक-दो बार हुई अनहोनी को लेकर किया है. अब गांव में सख्ती से इस फरमान पर अमल लिए सरपंच भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं.

गौरतलब है गांव ईशापुर खेड़ी में दो से तीन बार लड़कियों के अन्य युवकों के साथ भागने के मामले सामने आए थे, जिसके बाद पंचायतों की बदनामी हुई थी. पंचायत ने बदनामी के डर से गांव में फरमान जारी कर दिया कि लड़कियां जींस- टी-शर्ट के अलावा मोबाइल फोन अपने साथ नहीं रखेगी और गांव में अपने संस्कृति के अनुसार पहनावा डालकर अपनी गरिमा का ख्याल रखेंगी.

पंचायत ने इस फरमान को लेकर पिछले वर्ष गांव में मुनादी भी करवाई थी. इस फैसले के एक साल बीत जाने के बाद भी आज तक गांव में इस फरमान पर अमल जारी है. गांव में आज भी लड़कियों जींस पहने से डरती है और न ही मोबाइल रखती है.

गांव के सरपंच प्रेम ने बताया कि यह फरमान लगभग एक साल पहले जारी किया गया था, इन्हीं दिनों में गांव से मोबाइल फोन के माध्यम से दो से तीन लड़कियों के किसी अन्य गांव के युवक के साथ चले जाने के मामले उनके सामने आए थे जिसके बाद उन्होंने लड़कियों को जींस और मोबाइल नहीं रखने का फरमान जारी किया था.

अब इस फरमान को पूरी तरह से लागू करने के लिए लोगों की अलग-अलग मोहल्ले में बैठक आयोजित कर उन्हें जागरूक करने का काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में गांव की एेसी बदनामी न हो. सरपंच प्रेम ने बताया कि लड़कियों के मोबाइल फोन नहीं रखने व जींस नहीं पहनने का फरमान पिछले वर्ष जारी किया गया था, जिसका गांव में असर दिख रहा है.

उन्होंने बताया कि पंचायती फरमान के बाद से गांव से बाहर पढ़ने जाने वाली लड़कियां अब मोबाइल फोन लेकर अपने साथ नहीं जाती, जिससे लड़कियों का पहनावा भी बदल गया है. हालांकि इससे पहले अधिकतर लड़कियां जींस व टी-शर्ट डालकर स्कूल जाती थीं, लेकिन फरमान के बाद ऐसे मामलों में गिरावट दर्ज की गई है.

वहीं, पंचायती फरमान पर गांव की लड़कियों का कहना है कि जींस पहनने और मोबाइल रखने पर रोक के चलते वो अब जींस नहीं पहनती और न ही मोबाइल अपने पास रखती है, लेकिन उनका मानना है कि ऐसे फरमानों से उनकी आजादी पर रोक लगाई जा रही है. लड़कियों के मुताबिक आज जींस और मोबाइल हर आदमी की जरूरत बन चुका है और इन पर लगी रोक को हटाई जानी चाहिए.

गोहाना में पढ़ने वाली छात्राओं ने भी पंचायत की फरमान गलत बताते हुए कहा है कि किसी भी पंचायत को कोई हक़ नहीं है कि वह किसी पर रोक लगाए. लड़कियों का कहना है कि इस तरह की पंचायतों को अपनी सोच को बदलने की जरुरत है, क्योंकि वर्तमान में लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं है.
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