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इस जगह पर आने से पहले कई बार सोचते हैं राज्य के सीएम

ऐलनाबाद हरियाणा का हिस्सा होने के साथ-साथ इनेलो का गढ़ माना जाता है। यहां हमेशा इनेलो का ही कब्जा रहता है। लेकिन आज तक डर के चलते पार्टी के मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला अपने कार्यकाल के दौरान यहां नहीं आए। ऐलनाबाद में मौजूदा सीएम हुड्डा भी आने से कतराते हैं। लोगों का मानना है कि इस शहर में कोई भी सीएम आने से पहले से सोचते हैं। हालांकि विरोधी ही इसके उदाहरण दे रहे हैं और इनेलो के कार्यकर्ता इसे विरोधियों का प्रचार कहते हैं।

ऐलनाबाद हरियाणा का हिस्सा होने के साथ-साथ इनेलो का गढ़ माना जाता है। यहां हमेशा इनेलो का ही कब्जा रहता है। लेकिन आज तक डर के चलते पार्टी के मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला अपने कार्यकाल के दौरान यहां नहीं आए। ऐलनाबाद में मौजूदा सीएम हुड्डा भी आने से कतराते हैं। लोगों का मानना है कि इस शहर में कोई भी सीएम आने से पहले से सोचते हैं। हालांकि विरोधी ही इसके उदाहरण दे रहे हैं और इनेलो के कार्यकर्ता इसे विरोधियों का प्रचार कहते हैं।

ऐलनाबाद हरियाणा का हिस्सा होने के साथ-साथ इनेलो का गढ़ माना जाता है। यहां हमेशा इनेलो का ही कब्जा रहता है। लेकिन आज तक ...अधिक पढ़ें

  • News18
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    ऐलनाबाद हरियाणा का हिस्सा होने के साथ-साथ इनेलो का गढ़ माना जाता है। यहां हमेशा इनेलो का ही कब्जा रहता है। लेकिन आज तक डर के चलते पार्टी के मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला अपने कार्यकाल के दौरान यहां नहीं आए। ऐलनाबाद में मौजूदा सीएम हुड्डा भी आने से कतराते हैं। लोगों का मानना है कि इस शहर में कोई भी सीएम आने से पहले से सोचते हैं। हालांकि विरोधी ही इसके उदाहरण दे रहे हैं और इनेलो के कार्यकर्ता इसे विरोधियों का प्रचार कहते हैं।

    दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक 1999 से 2004 तक ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान वह ऐलनाबाद शहर कभी नहीं आए ऐलनाबाद से गुजरकर मिठी सुरेरा, मिठनपुरा, खारी सुरेरां, किशनपुरा, काशी का बास, केहरवाला गांवों में जाने के लिए दो नए बाइपास निकाले गए। एक तो हनुमानगढ़ बाइपास और दूसरा नोहर बाइपास। ताकि इन गांवों में जाने के लिए शहर में न आना पड़े। 2004 के लोकसभा चुनावों में शहर के वर्करों की मीटिंग सुरेरा चौक पर रखी गई।

    2008 में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का ऐलनाबाद में कार्यक्रम था। तब उन्होंने ऐलनाबाद का कार्यक्रम रद्द करने का फैसला कर लिया था। पार्टी के कार्यकर्ताओं के मानाए जाने पर सीएम राजी हुए और ऐलनाबाद आए। 2009 में जब पूर्ण बहुमत तक नहीं पहुंचे तो इसे ऐलनाबाद का भी असर बताया।

    हरियाणा किसान मोर्चा प्रदेश सचिव अरूण बैनीवाल ने बताया कि 1999 से लेकर 2004 तक मैं इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के साथ रहा। सीएम रहते वे कभी ऐलनाबाद शहर में नहीं आए।

    ऐलनबाद से पांच बार विधायक रहे भागीराम ने कहा की ऐलनाबाद आने पर लोकदल की सरकार गिरने की बातें झूठी हैं। ओमप्रकाश चौटाला ने कई शिलान्यास शहर में किए। 2009 में परिसीमन के बाद ओमप्रकाश चौटाला जीते और बाद में उपचुनाव में अभय सिंह चौटाला।

    Tags: Bhupinder singh hooda, Om Prakash Chautala

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