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Tokyo Olympics: मां के झुमके से बने लॉकेट को पहनकर सोनीपत के सुमित ने टीम इंडिया के साथ रचा इतिहास

दोनों बड़े भाइयों ने मजदूरी कर सुमित को बनाया हॉकी का खिलाड़ी

दोनों बड़े भाइयों ने मजदूरी कर सुमित को बनाया हॉकी का खिलाड़ी

Tokyo Olyympics: सुमित के माता-पिता मजदूरी करते थे और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. लेकिन सुमित ने हार नहीं मानी और वह ओलंपिक टीम का हिस्सा बना. वहीं, सुमित के पिता प्रताप सिंह ने कहा कि उसे खिलाड़ी बनाने के लिए उनके दोनों बड़े बेटों ने होटल में मजदूरी की है.

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सोनीपत. 41 साल बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian Men Hockey Team) ने इतिहास रच दिया. भारतीय टीम ने जर्मनी को हराते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता और एक बार फिर भारतीय हॉकी में जान फूंक दी. टोक्यो ओलंपिक खेलने गई भारतीय पुरुष हॉकी टीम का सोनीपत का रहने वाला सुमित भी हिस्सा है. वो टीम में बतौर मिडफील्डर खेला. सुमित के परिवार और गांव में जश्न का माहौल है. 6 माह पहले सुमित की मां का देहांत हो गया था और अपनी मां के सपने को पूरा करने के लिए पहले तो सुमित ने अपनी मां के झुमके तुड़वा कर उनसे लॉकेट बनवाया और उस लोकेट में अपनी मां का फोटो डालकर ओलंपिक में देश के लिए मेडल लेकर आया.

इस जीत के बाद भारतीय हॉकी टीम को बधाई देने वालों का तांता लग गया. इस टीम में बतौर मिडफील्डर खेल रहे सोनीपत के रहने वाले सुमित के संघर्ष की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं. सुमित के परिवार में हाल फिलहाल तीन भाई, पिता और एक भाभी के साथ तीन भतीजे भतीजी है. सुमित ने 7 साल की उम्र से हॉकी खेला शुरू किया था और ओलंपिक खेलने के सपने तक उसने अपने जीवन में संघर्ष ही संघर्ष किया है.

पिता प्रताप सिंह मुरथल के होटलों में मजदूरी करते थे. वहीं, तीनों भाई सुमित, अमित और जयसिंह अपने पिता का बोझ कम करने के लिए उनके साथ होटलों में मजदूरी करता थे. दोस्तों ने भी सुमित का जमकर साथ दिया और इस काबिल बनाया कि आज उसकी मौजूदगी में टीम में जर्मनी को हराते हुए कांस्य पदक जीता है.

सुमित के पिता प्रताप सिंह अपने परिवार की संघर्ष की कहानी बताते हुए कहते हैं कि उनके बेटे ने जी जान लगाकर मेहनत की है. आज उसी मेहनत का नतीजा है कि उसकी टीम ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है और इतिहास रचा है. उन्होंने बताया कि सुमित को खिलाड़ी बनाने के लिए उसके दोनों बड़े बेटे और उसने होटल में मजदूरी की. सुमित ने भी उनका साथ देते हुए होटल में मजदूरी की है.

सुमित के बड़े भाई जय सिंह बताते हैं कि 6 माह पहले उनकी माता का देहांत हो गया था और उनकी मां का सपना था कि सुमित ओलंपिक में खेले. आज सुमित ने कांस्य पदक जीतकर उनका और उनकी मां का सपना पूरा किया है. वहीं उन्होंने बताया कि मां के झुमके से जो सुमित के लॉकेट बनवाया है. उसमें मां का फोटो लगवा रखा है. जब वो ओलंपिक में गया था तो कहकर गया था कि मां उसके साथ है और अबकी बार हम मेडल जरूर लेकर आएंगे.

सुमित के बड़े भाई अमित बताते हैं कि सुमित ने आज पूरे देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. जब वह मेडल लेकर आएगा तो उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा. 41 साल बाद भारत का हॉकी में मेडल आया है. सुबह जब मैच शुरू हुआ तो हमारे दिलों की धड़कन बढ़ रही थी. लेकिन आखिरकार भारत ने मैच जीत कर साबित कर दिया कि यह नए युग की शुरुआत है

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