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इस प्रदेश में 2014 से कांग्रेस की जिला कमेटियां हैं भंग, पार्टी कैसे जीतेगी 2019 की जंग?

इस प्रदेश में 2014 से कांग्रेस की जिला कमेटियां हैं भंग, पार्टी कैसे जीतेगी 2019 की जंग?

हरियाणा में कांग्रेस कैसे जीतेगी 2019 की जंग?

हरियाणा में कांग्रेस कैसे जीतेगी 2019 की जंग?

हरियाणा में कांग्रेस का हाल: न कोई जिलाध्यक्ष, न ब्लॉक अध्यक्ष...आठ माह से प्रभारी तक नहीं, 2019 में बीजेपी का कैसे मुकाबले करेगी चार गुटों में बंटी कांग्रेस?

हरियाणा में विधानसभा चुनाव भले ही समय पर होंगे लेकिन बीजेपी ने तैयारी शुरू कर दी है. सीएम मनोहरलाल ने खुद हर विधानसभा में पहुंचने का लक्ष्य लेकर क्षेत्रवार रोड शो कर रहे हैं, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस वक्त जबरदस्त गुटबाजी का शिकार है. उसकी कोई सामूहिक रणनीति नहीं दिख रही है. 2014 में चुनाव हारने के बाद से ही पार्टी बिखरी हुई है. सभी जिला और ब्लॉक कमेटियां भंग हैं. आठ महीने से कोई प्रभारी नहीं है. जिसकी वजह से किसी भी जिले में न पार्टी की मासिक बैठक हो रही है न तो सामूहिक रूप से सरकार के खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन हो पा रहा है. जो भी प्रदर्शन हो रहे हैं वो टिकटों के दावेदार निजी तौर पर कर रहे हैं. (ये भी पढ़ें:
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इस समय हरियाणा में कांग्रेस कम से कम चार गुटों में बंटी हुई है. ये गुट हैं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा,  प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर,  पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के समर्थकों के. एक और गुट है कुलदीप बिश्नोई का. जिसमें से हुड्डा और तंवर गुट तो लंबे समय से प्रदेश में एक दूसरे के खिलाफ ही शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद हरियाणा में भी कांग्रेसी यह सपना पाले हुए हैं कि 2019 में उनकी सरकार आएगी. सवाल सिर्फ विधानसभा चुनाव का नहीं बल्कि उससे पहले लोकसभा का भी है.

bhupinder singh hooda         हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने कई प्रदेशों में कांग्रेस को चुस्त-दुरुस्त करने का काम किया. फ्रंटल संगठनों में भी फेरबदल किया. लेकिन हरियाणा में कोई बदलाव नहीं किया. हालात ये हैं कि हुड्डा और तंवर गुट की जंग में उलझी पार्टी में 2014 के बाद से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तक नहीं हुई है. प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने कमेटियां भंग कर दी थीं. पिछले चार साल से पार्टी में ब्लॉक स्तर पर भी कोई अध्यक्ष नहीं है.

पिछले आठ महीने से हरियाणा कांग्रेस के पास प्रभारी तक नहीं है. कमलनाथ ने मध्य प्रदेश का सीएम बनने से पहले अप्रैल में कांग्रेस का अध्यक्ष का पद संभाला था, तभी से हरियाणा के प्रभारी का पद खाली पड़ा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि एक-दो बार जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कवायद शुरू हुई लेकिन वह पूरी नहीं हुई. पिछले चार साल में जितने भी स्थानीय निकाय चुनाव हुए हैं उनमें किसी में भी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई. यहां तक कि मुस्लिम बहुल जिला मेवात में भी बीजेपी ने कांग्रेस को बैकफुट पर कर रखा है.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि इस वक्त कांग्रेस अपनी गुटबाजी की वजह से बैकफुट पर नजर आ रही है. जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है. हाल ही में हुए पांच नगर निगमों के चुनाव में भी पार्टी ने सिंबल पर उम्मीदवार नहीं उतारे. अशोक तंवर चाह रहे थे कि सिंबल पर चुनाव लड़ा जाए लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके विरोध में थे. पार्टी समर्थकों को समझ नहीं आया कि किसे वोट किया जाए. नतीजतन बीजेपी ने पांचों निगमों पर कब्जा कर लिया. (ये भी पढ़ें: क्यों 26 साल पहले बर्खास्त की गई थीं बीजेपी की चार राज्य सरकारें?)

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इसके बावजूद कांग्रेसी नेता मान रहे हैं कि हरियाणा में बीजेपी सरकार के खिलाफ लहर है. ऐसे में विधानसभा चुनाव में वह अच्छा प्रदर्शन करेगी. कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला, अशोक तंवर, किरण चौधरी, दीपेंद्र हुड्डा व कुलदीप विश्नोई जैसे चेहरे हैं लेकिन ये सब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जगह अपने-अपने गुट को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं. हरियाणा कांग्रेस का गढ़ रहा है. बीजेपी ने पहली बार यहां पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है.

इस बारे में जब प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, जब तक प्रदेश कांग्रेस को प्रभारी नहीं मिल जाएगा तब तक जिलाध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पाएगी. जनवरी में प्रभारी मिलने की उम्मीद है. लेकिन सभी जिलों में पार्टी के विभिन्न सेल काम कर रहे हैं. राज्य कार्यकारिणी काम कर रहे हैं. जो चुनाव लड़ना चाहते हैं वो मैदान में हैं. हम बीजेपी से बहुत मजबूत स्थिति में हैं.

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Tags: Ashok Tanwar, BJP, Congress, Haryana politics, Politics, Randeep Surjewala

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