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कैथल का बैटल: पिता-पुत्र से एक ही सीट पर 3 बार हारा इनेलो उम्मीदवार, बीजेपी कभी जीत न सकी

News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 4:54 PM IST
कैथल का बैटल: पिता-पुत्र से एक ही सीट पर 3 बार हारा इनेलो उम्मीदवार, बीजेपी कभी जीत न सकी
कैलाश भगत इंडियन नेशनल लोकदल के वो उम्मीदवार हैं जो कि एक ही जगह से लगातार 3 बार पिता-पुत्र से चुनाव हारे.

कैलाश भगत इंडियन नेशनल लोकदल के वो उम्मीदवार हैं जो कि एक ही जगह से लगातार 3 बार पिता-पुत्र से चुनाव हारे.

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  • Last Updated: October 17, 2019, 4:54 PM IST
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हरियाणा की सबसे हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट है कैथल. कैथल विधानसभा सीट कुरुक्षेत्र लोकसभा के अंतर्गत आती है. पिछले 14 साल से इस सीट पर सुरजेवाला परिवार का प्रभुत्व रहा है. साल 2005 में कैथल से कांग्रेस के टिकट पर शमशेर सिंह सुरजेवाला चुनाव जीते. उसके बाद उनकी सीट की विरासत को उनके बेटे रणदीप सुरजेवाला ने संभाली. लेकिन लेकिन रणदीप सुरजेवाला के लिए इस बार कैथल का बैटल आसान नहीं होगा. इसकी बड़ी वजह ये है कि रणदीप सिंह कैथल से विधायक होने के बावजूद जींद विधानसभा का उपचुनाव लड़ने चले गए थे. जींद में सुरजेवाला को करारी शिकस्त मिली और बड़ी मुश्किल से ज़मानत बची. सुरजेवाला के कैथल में जाने से बीजेपी यहां और मजबूत हो गई.

साल 2005 में सुरजेवाला परिवार ने इस सीट पर अपना पहला चुनाव लड़ा. शमशेर सुरजेवाला ने इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार कैलाश भगत को हराया. इसके बाद साल 2009 और 2014 में शमशेर के बेटे रणदीप सुरजेवाला यहां से विधायक बने. रणदीप सुरजेवाला ने यहां दोनों बार इनेलो उम्मीदवार कैलाश भगत को हराया.

बीजेपी कभी नहीं जीती कैथल सीट

कैलाश भगत इंडियन नेशनल लोकदल के वो उम्मीदवार हैं जो कि एक ही जगह से लगातार 3 बार पिता-पुत्र से चुनाव हारे.

कैथल सीट पर बीजेपी कभी जीती नहीं. यही वजह रही कि इस बार चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के उम्मीदवार लीला राम गुर्जर ने दूसरी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर बटन दबाने की अपील कर दी. दरअसल, लीला राम गुर्जर इंडियन नेशनल लोकदल से बीजेपी में आए हैं. साल 2000 में लीला राम गुर्जर इनेलो के टिकट से कैथल में जीते थे. कैथल में इनेलो का खाता सिर्फ लीला राम गुर्जर की वजह से ही खुल सका.

ओम प्रभा जैन 15 साल तक रहीं विधायक

साल 1952 में कैथल में पहला विधानसभा चुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस के दौलतराम जीतकर विधायक बने. लेकिन साल 1957 से 1972 तक वो विधायक रहीं. ओम प्रभा जैन कैथल सीट से लगातार 15 साल तक विधायक रहीं और उन्होंने 1957,1962,1967,1968 तक लगातार 4 बार चुनाव जीता. लेकिन साल 1972 में वो निर्दलीय विधायक चरणदास शोरेवाला से चुनाव हार गईं. ओम प्रभा जैन की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई. साल 1982 में हुए चुनाव में निर्दलीय विधायक रोशन लाल तिवारी जीते. इसके बाद साल 1987 में कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार मदान चुनाव जीते. साल 1991 में एक बार फिर किस्मत सुरेंद्र कुमार मदान पर मेहरबान रही और वो चुनाव जीते. साल 1996 में कैथल सीट से ओम प्रभा जैन को हराने वाले चरणदास शोरेवाला जीते. साल 2000 में यहां से इनेलो के उम्मीदवार रहे लीला राम ने जीत हासिल की. इसके बाद कांग्रेस ने फिर से कैथल की सीट पर वापसी की और फिलहाल उसी का कब्जा है.

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First published: October 9, 2019, 3:39 PM IST
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