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...जब देश के सबसे पिछड़े जिले में नहीं बनने दिया गया ट्रंप विलेज, ये है पूरा मामला!
Mewat News in Hindi

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 4:33 PM IST
...जब देश के सबसे पिछड़े जिले में नहीं बनने दिया गया ट्रंप विलेज, ये है पूरा मामला!
मेवात के मरोड़ा गांव का नाम 'ट्रंप विलेज' रखा गया था (File Photo)

जून 2017 में एक एनजीओ ने देश के सबसे पिछड़े जिले मेवात के मरोड़ा गांव को गोद लेकर इसका नाम 'ट्रंप विलेज' रखा था, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया था

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  • Last Updated: February 22, 2020, 4:33 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के स्वागत के लिए देश तैयार है. वो 24 फरवरी को भारत के दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरे का फायदा देश के सबसे पिछड़े जिले मेवात (Mewat) के विकास का विकास करवाने के लिए किया जा सकता था लेकिन हरियाणा के नौकरशाहों की जिद के आगे सरकार यह मौका भुनाने से चुक गई. 23 जून 2017 को एक एनजीओ ने मेवात के मरोड़ा गांव को गोद लेकर इसका नाम 'ट्रंप विलेज' रखा था, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया था. जबकि इसे लेकर वहां एक कार्यक्रम हुआ था. 95 घरों में स्वच्छता अभियान के तहत टॉयलेट तक बनवाए गए थे.

नीति आयोग मेवात को देश का सबसे पिछड़ा जिला घोषित कर चुका है. यह जिला दिल्ली से 100 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर और हरियाणा के गुरुग्राम शहर के बीच पड़ता है. लेकिन विकास के मामले में यह जिला कोसों दूर है. सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ापन यहां हर ओर देखा जा सकता है. वाशिंगटन डीसी के एक कम्युनिटी इवेंट में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक ने 13 जून को अमेरिकी लोगों को एक प्रेजेंटेशन देते हुए उन्होंने कहा भारत में 'ट्रंप विलेज' बनाने की घोषणा की थी, ताकि वहां के लोग देश के सबसे पिछड़े जिले में विकास कार्य करवाएं.

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जून 2017 में मेवात का यह गांव सजा दिया गया था


इसके लिए 10 दिन बाद इस गांव में 'ट्रंप विलेज' के बोर्ड लगवाए गए. कार्यक्रम हुआ. ग्रामीणों में उम्मीद जगी कि अब उनका विकास होगा. मेवात के पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राजुद्दीन जंग का कहना है कि प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया. प्रशासन ने कहा कि 'ट्रंप विलेज' नहीं इस गांव का नाम मरोड़ा ही रहेगा. अधिकारियों का तर्क था कि किसी भी राजस्व गांव का नाम बदलने की एक प्रक्रिया होती है. इस बदलाव की वजह से ही रिकॉर्ड में बदलाव होगा, इसलिए इसे रिजेक्ट कर दिया गया.



राजुद्दीन का मानना है कि यदि प्रशासन इस गांव का नाम बदलकर ट्रंप के नाम पर रख देता तो आज अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को हरियाणा सरकार भुना सकती थी. उन्हें यहां बुलाकर मेवात को भी दूसरे जिलों की तरह आगे बढ़ा सकती थी. वास्तविकता तो यह है कि इस जिले के विकास में न सरकार की दिलचस्पी है और न अधिकारियों की.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 फरवरी को भारत के पहले दौरे पर आएंगे.


सुलभ इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधि ने कहा कि हम मेवात के गांवों का विकास करना चाहते थे, लेकिन 'ट्रंप विलेज' को लेकर जो प्रशासन का रवैया था उससे हमें धक्का लगा. हमने पत्र भी भेजा लेकिन प्रशासन ने मरोड़ा गांव को 'ट्रंप विलेज' नहीं बनने दिया. लेकिन वहां के कई गांवों में हम लोग अब भी काम कर रहे हैं.

 

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First published: February 22, 2020, 3:40 PM IST
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