बड़े जल संकट की कगार पर रेवाड़ी, कुमारी शैलजा ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
Rewari News in Hindi

बड़े जल संकट की कगार पर रेवाड़ी, कुमारी शैलजा ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
राज्यसभा में उठा रेवाड़ी में पानी की समस्या का मुद्दा (File Photo)

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने राज्यसभा में बताया कि रेवाड़ी के तीन ब्लॉक अत्यधिक जलदोहन वाली श्रेणी में, जिले में भू-जल दोहन का स्तर 91.28 फीसदी

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2020, 6:40 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. हरियाणा (Haryana) में आने वाले एनसीआर के एक जिले रेवाड़ी (Rewari) में बड़ा जलसंकट पैदा होने वाला है. इसके एक गांव को पेयजल उपलब्ध करवाने को लेकर कुमारी शैलजा ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में मुद्दा उठाया, इसके बाद केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जो जवाब दिया उससे पता चलता है कि यह जिला जल संकट के बड़े दौर से गुजरने वाला है.

शेखावत ने बताया कि केंद्रीय भू-जल बोर्ड और राज्य भू-जल विभाग ने संयुक्त रूप से भारत के डायनामिक भू-जल संसाधनों का आकलन करवाया है. इसके मुताबिक हरियाणा के रेवाड़ी जिले में भू-जल दोहन का स्तर 91.28 फीसदी है. यहां के खोल, नहर और रेवाड़ी खंड को अत्यधिक जल दोहित श्रेणी में रखा गया है. जबकि दाहिना और जटुसना खंड को अर्ध-गंभीर रूप से दोहित में रखा गया है. सिर्फ बावल खंड सुरक्षित श्रेणी में है.

मंत्री ने बताया कि कुल वार्षिक भू-जल पुनर्भरण (Extractable) 42,700 हेक्टेयर मीटर (एचएएम) और वार्षिक दोहित भू-जल संसाधन 38,430 हेक्टेयर मीटर है. रेवाड़ी में सिचाई उद्देश्य हेतु 84 फीसदी, घरेलू उपयोग हेतु 15 फीसदी की तुलना में औद्योगिक उद्देश्य हेतु भू-जल दोहन मात्र 1% है.



 water crisis in Rewari, water crisis in Haryana, MP Kumari Selja, Rajya Sabha, jal shakti ministry, gajendra singh shekhawat, drinking water, रेवाड़ी में पानी का संकट, हरियाणा में पानी का संकट, सांसद कुमारी सैलजा, राज्यसभा, जल शक्ति मंत्रालय, गजेंद्र सिंह शेखावत, पीने का पानी
रेवाड़ी में कभी साहिबी नाम की नदी हुआ करती थी, लेकिन अब वह सूख गई है




पानी के लिए परमिशन

केंद्रीय भूजल बोर्ड के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक रेवाड़ी में कुल 134 उद्योगों ने अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है, जिनमें से पात्र उद्योगों को 24 अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं और 43 उदयोगों के एनओसी आवेदनों को रद्द कर दिया गया है. जबकि 67 के आवेदन विचाराधीन हैं.

हरियाणा में भू-जल दोहन कम करने का प्रयास

हरियाणा उन प्रदेशों में शामिल है जहां पर भू-जल का अत्यधिक दोहन होता है. यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर आधारित हैं. यूनाइटेड नेशंस के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक भारत में 90 परसेंट पानी का इस्तेमाल कृषि में होता है. इसीलिए मनोहर लाल सरकार ने भू-जल स्तर गिरने से रोकने के लिए एक योजना तैयार की है, जिसके तहत धान को छोड़कर पानी की कम खपत वाली फसलें उगाने वाले किसानों को सरकार नगद सहायता देगी.

ये भी पढ़ें:

गन्ना और धान की फसल से बढ़ रहा है जल संकट, आखिर क्या करें किसान?

 

इस स्कीम का फायदा ले रहे 5.5 लाख किसान, एक रजिस्ट्रेशन से मिलेंगे कई लाभ, ऐसे जुड़ सकते हैं आप
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading