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राजा के ऐशगाह पर सैकड़ों साल बाद भी दूर-दूर से आते हैं लोग जूते मारने

टीले पर जूते मारते लोग
टीले पर जूते मारते लोग

राजा की मौत के सैकड़ों साल बाद भी उसे सजा देने के लिए यमुनानगर ( Yamunanagar) के कपाल मोचन के पास उसकी ऐशगाह (king's revelry house) पर लोग दूर-दूर से जूते मारने आते हैं.

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यमुनानगर. हरियाणा के यमुनानगर में एक ऐसी जगह है जहां लोग हजारों साल पुरानी एक बेहद रोचक परंपरा को निभाने आते हैं. यहां मिट्टी के ढेर पर सैकड़ों लोग हर साल जूते-चप्पल और पत्थर बरसाते हैं. इस परंपरा के पीछे कहानी है कि इस इलाके का एक राजा बेहद अय्याश था और नई नवेली दुल्हनों की डोली लूटकर दुल्हनों को यहा लाया करता था. लोग सैकड़ों साल पहले किए अपराध की सजा देने के लिए आज भी दूर-दूर से यहां आते हैं. अय्याश राजा तो सैकड़ों साल पहले इस दुनिया से चला गया लेकिन आज भी राजा की ऐशगाह (king's revelry house) पर लोग आते हैं और उसके ध्वस्त हो चुके किले पर जूते- चप्पल और पत्थर मारकर उसे सजा देते हैं. यह किला यमुनानगर ( Yamunanagar) के कपाल मोचन के पास है. यहां इन दिनों सैकड़ों लोग सिर्फ जूते मारने के लिए आ रहे हैं.

डोली लूटकर लाता था राजा, करता था यहां गलत काम

लंबी-लंबी कतारों में आकर महिला-पुरुष हाथों में जूते और चप्पल लेकर आते हैं और आते ही मिट्टी के टीले पर मारने लगते हैं. यह किला कभी राजा जरासंध का होता था. इस जगह पर एक राजा नव विवाहिताओं की डोली लूट कर लाता था और उन दुल्हनों के साथ यहां गलत काम करता था. एक दुल्हन राजा की कैद से फरार हो गई और वह राजा के हाथ आने से पहले ही उसे शाप देकर तालाब में कूद गई. कहा जाता है कि दुल्हन तो सती हो गई लेकिन उसके तालाब में समाते ही राजा का किला मिट्टी की ढेर में तब्दील हो गया.



पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आते हैं लोग
राजा का किला तो किसी काम का नहीं रहा लेकिन सैकड़ों साल बीत जाने के बाद भी आज भी जब कार्तिक मास आता है तो पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लोग यमुनानगर के कपाल मोचन में आते हैं और मिट्टी की ढेर पर जूते- चप्पल मारते हैं.

टीले पर जूते मारकर अय्याश राजा को आज भी दी जाती है सजा


कपाल मोचन से यह लगभग आठ - दस किलोमीटर की दूरी पर जंगल के बीच में देखते-देखते यहां पर सती का मंदिर भी बन गया. लोग जब भी मंदिर में माथा टेकने के लिए यहां आते हैं तो वे पहले मंदिर में नतमस्तक होते हैं और बाद में मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर इस टीले पर जूते मारने के लिए आते हैं. लोग इस काम को अंजाम देने के साथ- साथ अधर्मी राजा को गालियां देने में भी गुरेज नहीं करते. इस  काम को केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी बखूबी अंजाम देती हैं.

 
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