स्‍टेशन पर मां-बाप के साथ सो रही पांच साल की बच्‍ची का अपहरण और रेप

बच्ची का अपहरण रेलवे पुलिस थाने के सामने से हुआ और रेप प्लेटफार्म नंबर दो पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) थाने के सामने. बच्ची जब परिजनों को मिली तो मौके पर मौजूद पुलिस कर्मचारी ने कोई भी कार्रवाई करने से यह कहकर टाल दिया कि आरोपी को पहचानते हो, तो उसके बारे में जानकारी दो, तभी कार्रवाई होगी. फिलहाल बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई.

Tilak Bhardwaj | News18 Haryana
Updated: September 30, 2018, 1:44 PM IST
स्‍टेशन पर मां-बाप के साथ सो रही पांच साल की बच्‍ची का अपहरण और रेप
मौका मुआयना करती रेलवे और महिला थाना पुलिस.
Tilak Bhardwaj | News18 Haryana
Updated: September 30, 2018, 1:44 PM IST
हरियाणा के यमुनानगर में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक मामला आया है. यहां रेलवे स्टेशन पर अपने मां-बाप के साथ सो रही पांच साल की मासूम बच्ची का अपहरण करने के बाद उसके साथ रेप किया गया. हैरानी की बात यह रही कि बच्ची का अपहरण रेलवे पुलिस थाने के सामने से हुआ और रेप प्लेटफार्म नंबर दो पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) थाने के सामने. खून से लथपथ और दर्द से चीखती बच्‍ची को लोगों ने देखकर भी अनदेखा कर दिया. बच्ची जब परिजनों को मिली तो मौके पर मौजूद पुलिस कर्मचारी ने कोई भी कार्रवाई करने से यह कहकर टाल दिया कि आरोपी को पहचानते हो, तो ही कार्रवाई होगी. फिलहाल बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई.

मामला यमुनानगर के रेलवे स्टेशन का है. यहां पर शनिवार को एक परिवार स्टेशन पर रेलवे थाने के बिलकुल सामने ही सो रहा था. अचानक रात एक बजे पांच साल की मासूम बच्ची बिस्तर से गायब मिली तो परिजनों के भी होश उड़ गए. आनन-फानन में बच्ची की तलाश की गई तो वह प्लेटफार्म नंबर दो पर आरपीएफ थाने के सामने मिली. बच्ची नग्न हालत में खून से लथपथ थी और दर्द से चीख रही थी. लोगों ने बच्ची को देखा भी, लेकिन कोई उसका सहारा नहीं बना. बच्ची के परिजनों ने जब उसे देखा तो वह प्लेटफार्म पर तैनात एक पुलिस कर्मचारी के पास शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन उस खाकीधारी का यह जवाब था कि क्या तुम लोग आरोपी को पहचानते हो. अगर पहचानते हो तो उसे ढूंढकर बताओ कि वह कहां है. हम कार्रवाई कर देंगे.



इसके बाद परिवार के लोग रेलवे पुलिस थाने पहुंचे, लेकिन वहां दरवाजा बंद होने के कारण वे वापस थाने के सामने आ गए. इस बीच बच्ची की हालत गंभीर होती जा रही थी. ऐसे में रविवार सुबह होते ही सात बजे परिवार के लोग उसे सिविल अस्पताल में लेकर पहुंचे. यहां डाक्टरों ने बच्ची के साथ रेप की पुष्टि करते हुए महिला थाने में सूचना दे दी. हालांकि यह सूचना रेलवे पुलिस को भी दी गई, लेकिन महिला थाने से तो पुलिस कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गई, पर रेलवे पुलिस ने आते-आते दस बजा दिए.

इसके बाद दोनों पुलिस विभागों के बीच विवाद रहा कि मामला महिला थाने का बनता है या रेलवे पुलिस थाने का. ऐसे में मामला दर्ज करने से पहले पुलिस घटना स्थल का दौरा करने पहुंची और यह देखने लगी कि मामला किस थाने के पास आता है. 10 घंटे बीत जाने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और देखा कि रेलवे स्टेशन के अंदर से ही बच्ची का अपहरण हुआ था और स्टेशन पर ही प्लेटफार्म नंबर दो पर आरपीएफ थाने के सामने ही बच्ची से रेप हुआ. ऐसे में महिला थाने ने पूरे मामले की जानकारी जीआरपी को दे दी और रेलवे पुलिस से ही अपहरण और रेप का मामला दर्ज करने के लिए कहा.

इसके बाद भी रेलवे पुलिस बच्‍ची का मेडिकल कराने और मामले जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ रही थी. घटना के 11 घंटे बीत जाने के बाद भी रेलवे पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था. सवाल यह उठता है कि जब प्लेटफार्म पर पुलिस हर समय तैनात रहती है तो यह कैसे हो गया. आखिर वह कौन खाकीधारी था, जिसने यह कह दिया कि आरोपी को पहचानते हो तो कार्रवाई होगी. क्या यही खाकी का काम है.

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