गंदे पानी से बन रही थी बर्फ, कैंपर में भरा जा रहा था दूषित पानी

फैक्‍टरी सील करते कर्मचारी.
फैक्‍टरी सील करते कर्मचारी.

फैक्‍टरियों में जिस पानी से बर्फ बनाई जा रही थी, उसे जांच में दूषित पाया गया. गंदे पानी से बनने वाले बर्फ को बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था. इसके साथ ही दुकानों से लेकर शादी-विवाह में सप्‍लाई किए जाने वाले पानी के कैंपर की जांच की तो उनमें नलों से भी गंदा पानी पाया गया.

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मौसम के करवट लेते ही स्वास्थ्य विभाग अपनी नींद से जागा और आनन-फानन में जब आइस फैक्‍टरियों पर रेड की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. दरअसल जिन फैक्‍टरियों में बर्फ बनाने का काम हो रहा था, वहा पर गंदा पानी इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनके सैंपल लेते ही फेल हो गए. ऐसे में दुकानों पर सप्‍लाई होने वाले कैंपरों के पानी का सैंपल भी पास नहीं हुआ. वह भी सीधे ही नलों से भरकर बजारों में सप्लाई हो रहा था, जिसके चलते प्रशासन ने दस फैक्‍टरि‍यों को सील कर कार्रवाई आरंभ कर दी है.

हरियाणा के यमुनानगर में लंबे समय तक तो कभी प्रशासन ने किसी भी बर्फ की फैक्टरी की जांच नहीं की और न ही प्रशासन को आज तक यह पता चला कि कहां-कहां बर्फ बनाई जाती है और कहां-कहां पानी के कैंपर भरकर उन्‍हें बाजारों में भेजा जाता है.

जब इस मामले में प्रशासन हरकत में आया और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देने के बाद इन फैक्‍टरियों से सैंपल भरे तो हैरान कर देने वाला मामले सामने आए. दरअसल फैक्‍टरियों में जिस पानी से बर्फ बनाई जा रही थी, उसे जांच में दूषित पाया गया. गंदे पानी से बनने वाले बर्फ को बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था. पानी के लिए गए सैंपल मौके पर ही फेल हो गए.



इसके साथ ही दुकानों से लेकर शादी-विवाह में सप्‍लाई किए जाने वाले पानी के कैंपर की जांच की तो नलों से भी गंदा पानी इनमें पाया गया. जांच में यह भी सामने आया कि यह पानी सीधे ही नलों से भरकर बाजार में सप्लाई किया जा रहा था. हालांकि शुरूआती जांच में लगभग 50 फैक्‍टरियोंं की जानकारी सामने आई है. दूषित पानी के उपयोग के चलते दस फैक्‍टरियों को तो मौके पर ही सील कर दिया गया है, जबकि अन्य फैक्‍टरियों की शनिवार को जांच चल रही है.
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