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यमुनानगर में सड़ गया साढ़े 4 करोड़ का गेहूं, MSP पर खरीदा 25 हजार क्विंटल गेहूं जानवरों के खाने लायक भी नहीं बचा

यमुनानगर में सड़ गया साढ़े 4 करोड़ का गेहूं, MSP पर खरीदा 25 हजार क्विंटल गेहूं जानवरों के खाने लायक भी नहीं बचा

हरियाणा के यमुनानगर जिले में साढ़े 4 करोड़ का गेहूं सड़ गया. अब इस मामले की जांच हो रही है.

हरियाणा के यमुनानगर जिले में साढ़े 4 करोड़ का गेहूं सड़ गया. अब इस मामले की जांच हो रही है.

Haryana News: हरियाणा स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन ने 2 साल पहले यानि 2019-20 में यह 25 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया था. उस समय गेहूं का MSP 1840 रुपए प्रति क्विंटल था. इस हिसाब से यह गेहूं 4 करोड़ 60 लाख रुपए का बनता है. इस गेहूं को केंद्रीय पूल (Central Pool) में भेजा जाना था, लेकिन कॉरपोरेशन की लापरवाही से यह मिट्टी में मिल गया. हरियाणा और पंजाब में यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है. कई जगह तो स्थिति यह है कि गेहूं में पानी डाल कर इसे खराब किया जाता है. ताकि गेहूं के स्टोर में जो गड़बड़ी की है, वह छुप पाए.

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    यमुनानगर. हरियाणा में यमुनानगर (Yamuna Nagar) जिले के बिलासपुर खंड में हरियाणा स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन (Haryana State Warehousing Corporation) का खुले में स्टोर किया गया 50 हजार बोरी गेहूं सड़ (50 thousand sacks of wheat rotten) गया. हालत यह है कि एक चौकीदार की निगरानी में पड़ा यह गेहूं अब इंसान तो क्या, जानवरों के खाने लायक भी नहीं बचा है. यहां पड़ा गेहूं सड़ांध मार रहा है.

    हरियाणा वेयरहाउस कॉरपोरेशन ने दो साल पहले यानि 2019-20 में यह 25 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा. उस समय गेहूं का MSP 1840 रुपए प्रति क्विंटल था. इस हिसाब से यह गेहूं 4 करोड़ 60 लाख रुपए का बनता है. इस गेहूं को केंद्रीय पूल (Central Pool) में भेजा जाना था, लेकिन कॉरपोरेशन की लापरवाही से यह मिट्टी में मिल गया.

    संस्था यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल का कहना है कि गेहूं सड़ा नहीं, बल्कि जानबूझकर सड़ाया गया है. इसके पीछे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का षड्यंत्र है. सोची-समझी साजिश के तहत इस घपले को अंजाम दिया गया है.

    खुले में गेहूं स्टोर किया जाएगा तो नमी लगेगी ही

    गेहूं खुले में स्टोर नहीं होता. अगर इसे खुले में स्टोर किया गया तो इसमें नमी आनी है और इस वजह से खराब होने का अंदेशा 60 गुणा तक बढ़ जाता है. गेहूं स्टोर किया गया तो इस पर तिरपाल होनी चाहिए थी और वह भी हर माह बदलनी होती है. एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि सरकारी गेहूं के फर्जीवाड़े को दबाने के लिए जानबूझ कर गेहूं को खराब किया जाता है.

    हरियाणा और पंजाब में यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है. कई जगह तो स्थिति यह है कि गेहूं में पानी डाल कर इसे खराब किया जाता है. ताकि गेहूं के स्टोर में जो गड़बड़ी की है, वह छुप पाए. क्योंकि अनाज के सड़ने के बाद यह पता नहीं चल पाता कि गेहूं चोरी हुआ या फिर फर्जी खरीद हुई है.

    कमेटी का गठन, जांच के बाद अगल किया जाएगा गेहूं

    कॉरपोरेशन के डीएम अजय कुमार ने बताया कि गेहूं के निपटाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी जांच करेंगी कि कितना गेहूं ठीक है कितना खराब हो गया। इसकी रिपोर्ट आने के बाद गेहूं को अलग अलग किया जाएगा. जो गेहूं ठीक होगा, उसे अलग किया जाएगा. जो गेहूं खराब हो गया उसे अलग कर सरकार को रिपोर्ट भेज दी जाएगी. वहां से जो भी आदेश होंगे, इसके मुताबिक आगे की कार्यवाही होगी.

    Tags: Haryana news, Haryana news live, Wheat Procurement

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