हाईकोर्ट ने हर्जाने के तौर पर पत्नी को दिलवाया 20 किलो चावल, 5 किलो घी और 3 सलवार सूट

कोर्ट ने आदेश दिया कि पत्नी को यह सामाना तीन दिन के अंदर देना होगा. इसके साथ ही पत्नी से अलग होने के बाद अब तक की क्षतिपूर्ति भी भरनी होगी.

कोर्ट ने आदेश दिया कि पत्नी को यह सामाना तीन दिन के अंदर देना होगा. इसके साथ ही पत्नी से अलग होने के बाद अब तक की क्षतिपूर्ति भी भरनी होगी.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पति की अपील पर यह आदेश सुनाया है, सुनवाई के दौरान पति ने कोर्ट को बताया था कि उसके पास नौकरी नहीं है लेकिन वह पत्नी की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 19, 2019, 12:04 PM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए रोचक फैसला दिया है. अदालत ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी से तलाक लेने पर हर्जाने के तौर पर उसे चावल, दाल, चीनी, दूध, घी और 3 नए सलवार सूट देने का आदेश दिया है. हरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले इस व्यक्ति ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी कि उसके पास नौकरी नहीं है इसलिए वो पत्नी को हर्जाना रुपये के तौर पर नहीं दे सकता है. लेकिन वो इसके एवज में उसकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति कर सकता है.

हर्जाने के रूप में 5 किलो घी और 20 किलो चावल

व्यक्ति ने कोर्ट के सामने कहा कि वो चावल, चीनी, दूध जैसी हर दिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं को पूरा करने में सक्षम है. इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि वो अपनी पत्नी को हर महीने 20 किलो चावल, 5 किलो चीनी, 5 किलो दाल, 15 किलो गेहूं, 2 किलो दूध और 5 किलो घी हर महीने देगा. इसके साथ ही हर 3 महीने में वो पत्नी को 3 सलवार सूट भी देगा.



तीन दिन में देना होगा सामान
हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया कि उसे अपनी पत्नी को यह सामान 3 दिन के अंदर देना होगा. इसके साथ ही पत्नी से अलग होने के बाद अब तक की क्षतिपूर्ति भी भरनी होगी. साथ ही उसे आदेश दिया गया कि अगली तारीख पर पेश होने के साथ ही इसका पूरा ब्यौरा पेश किया जाए. साथ ही पुरानी नौकरी और वेतन संबंधी जानकारी भी दी जाए.

ढील दी तो सख्ती भी दिखाई

पति की आर्थिक हालत को देखते हुए जहां एक तरफ कोर्ट ने उसे ढील देते हुए सामान्य से हर्जाने का आदेश दिया वहीं कोर्ट ने सख्ती भी दिखाई. कोर्ट ने कहा कि इस हर्जाने को भरने में कोई भी ढील नहीं बरती जाए और 25 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर पेश होकर इस बात की पूरी जानकारी दी जाए कि हर्जाना जितना बताया गया उतना दिया गया या नहीं. साथ ही कोर्ट ने आरोपी की सभी जमा पूंजी का रिकॉर्ड भी तलब किया है.

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