फर्जी डिग्री मामला: अब तक APG यूनिवर्सिटी की 45 डिग्रियां मिलीं फर्जी, जांच जारी

फर्जी डिग्री मामले में APG यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसता जा रहा है.
फर्जी डिग्री मामले में APG यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसता जा रहा है.

एपीजी विश्वविद्यालय (APG University) फर्जी डिग्री मामले में सीआईडी (CID) जांच में 45 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं. जांच में बीएएलएलबी, एलएलबी और बीबीए कोर्सिज की डिग्रियां फर्जी मिली हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 2:25 PM IST
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शिमला. हिमाचल (Himachal) में फर्जी डिग्री (Fake degree case) मामले को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. इससे फर्जी डिग्री मामले में फंसे एपीजी (APG University) विश्वविद्यालय की मुश्किलें और भी बढ़ती जा रही हैं. सीआईडी (CID) जांच में शिमला स्थित एपीजी यूनिवर्सिटी की करीब 45 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं. अभी सीआईडी मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसी को आशंका है कि अभी सैकड़ों फर्जी डिग्रियों सामने आ सकती हैं. अभी तक जांच में बीएएलएलबी, एलएलबी और बीबीए कोर्सिज की डिग्रियां फर्जी गई हैं.

इन कोर्सेस की डिग्रियां मिलीं फर्जी
बीएएलएलबी के 2013 बैच की 2, एलएलबी के 2014 की 26 और इसी बैच में दो छात्रों के फर्जी एडमिशन भी सामने आए हैं. इसके अलावा 2015 बैच के बीबीए कोर्स की 11 डिग्री फर्जी मिला हैं. इसके अलावा बीटेक, एमबीए, फैशन डिजाइनिंग, बीएचएम समेत अन्य कई कोर्सों की जांच होनी अभी बाकी है. जानकारी यह भी आ रही है कि मामले में जो एक गवाह है, उसने ई-मेल के जरिए अपना बयान दर्ज कराया है. ये गवाह एपीजी विश्वविद्यालय का पूर्व शिक्षक है और अभी राज्य से बाहर है.

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डीजीपी को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट


इस मामले में एक नई जानकारी मिली है कि सीआईडी एक हफ्ते के भीतर अब तक की जांच रिपोर्ट डीजीपी को सौंपेगी. डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि मामले की जांच जारी है और वो खुद समय- समय पर जांच की समीक्षा कर रहे हैं. आपको बता दें कि इस मामले में एपीजी विवि के खिलाफ सीआईडी पुलिस स्टेशन भराड़ी में FIR दर्ज हुई है. IPC की धारा 465, 467, 471, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है.

सीआईडी खंगाल रही रिकार्ड
बता दें कि कुछ समय पहले एपीजी विवि में सीआईडी की टीम ने चार दिनों तक रेड करके रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लिया था, जिसे खंगाला जा रहा है. साथ ही विवि के कम्प्यूटर्स से हार्ड डिस्क ली गई है. FSL लैब भेजा गया है. जांच में ये भी पता चला है कि एपीजी प्रशासन ने साल 2019 तक का अधिकतर रिकार्ड जला दिया है. एक अवैध कमेटी गठित कर रिकॉर्ड को नष्ट किया गया है.

परीक्षा शाखा में जिस रजिस्टर में छात्रों द्वारा परीक्षा में लिए गए अंकों के रिकॉर्ड समेत अन्य जानकारी दर्ज होती है, वो रजिस्ट्रर जांच टीम को दिया गया है. उत्तर पुस्तिका में छात्रों को जो अंक मिलते हैं, उसका रिकार्ड शिक्षकों के पास भी होता है, आशंका इस बात की है कि शिक्षकों के पास मौजूद रिकॉर्ड और रजिस्ट्रर में दर्ज रिकार्ड में गड़बड़ी है. कई जगहों पर 8-9 शिक्षकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं.
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