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7वीं पास किसान ने बनाई मक्का निकालने की मशीन, चंद मिनटों में हो जाते है कई क्विंटल दाने अलग

Arun Chandel | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 22, 2019, 7:30 PM IST
7वीं पास किसान ने बनाई मक्का निकालने की मशीन, चंद मिनटों में हो जाते है कई क्विंटल दाने अलग
किसान गुरदेव सिंह ने मक्का छीलने की यह मशीन छह से सात हजार की लागत में तैयार कर दी है.

हिमाचल के बिलासपुर जिले (Bilaspur District) के सातवीं कक्षा पास किसान (Seventh Class Passed Farmer) गुरदेव सिंह (Gurdev singh) ने मक्का छीलने (Maize peeling machine) की मशीन बनाई है, जो चंद मिनट में कई क्विंटल दाने अलग कर सकता है.

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बिलासपुर. हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले (Bilaspur District) के उपमंडल स्वारघाट के तहत कुटैहला पंचायत के गांव धारभरथा के सातवीं कक्षा पास (Seventh Class Passed Farmer) किसान गुरदेव सिंह (Gurdev singh) ने एक ऐसी मशीन बनाई है, जो चंद मिनट में मक्के (maize peeler machine) के दाने अलग कर सकता है. यह मशीन चंद मिनटों में क्विंटलों के हिसाब से मक्की के दाने निकाल सकती है. इस मशीन की खासियत है कि बाजार में मिलने वाली मक्की पिलर मशीनों से दो से तीन गुना अधिक क्षमता के साथ काम करती है. यह बाजार में उपलब्ध मशीनों की तुलना में काफी किफायती है.

छह हजार रुपये की लागत से बना ली मक्की पिलर मशीन

गुरदेव सिंह ने बताया कि एक बार वह लुधियाना इंडस्ट्री में मक्की पिलर मशीन लाने के लिए गए थे, लेकिन वहां पर उनकी पसंद की कोई मशीन नहीं मिली. इसके बाद घर आने पर गुरदेव सिंह ने स्वयं मशीन बनाने की कोशिश की और छह से सात हजार की लागत से यह मशीन तैयार कर दी है.

इस इलाके में मक्के की अच्छी पैदावार होती है

बिलासपुर जिले के कुछ इलाकों में मक्की की फसल पर्याप्त मात्रा में होती है और हर परिवार के पास औसतन 5 से 10 क्विंटल मक्की की पैदावार होती है. मक्की के दाने निकालने के लिए ग्रामीणों को काफी मेहनत करनी पड़ती है और इसे छीलने में कईं दिन लग जाते हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए सातवीं क्लास तक पढ़े गुरदेव सिंह ने हाल ही में एक छोटी तथा कारगर मशीन का अविष्कार कर लिया है.

इस मशीन की ये है खासियत

इस मशीन की खासियत यह है कि इसमें एक से दो टोकरी मक्की आ जाती है, जिसे यह मशीन कुछ ही मिनट में मक्की के दाने अलग कर देती है जबकि बाजार में मिलने वाली महंगी मक्की पिलर मशीनों में एक-दो छल्ली से ज्यादा नहीं जाती और इन मशीनों में दाने अलग करने के लिए भी काफी समय लगता है. इस मशीन की एक ओर खासियत यह है कि इसमें मक्की के जो अवशेष (गुल्ली) बचते है वो पूरे के पूरे निकल जाते है, टूटते नहीं हैं. अन्य मशीनों में अवशेष (गुल्ली) के कई-कई टुकड़े हो जाते हैं. बीज निकलने के बाद शेष बचे हिस्से जिसे गुल्ली कहा जाता है, उसे सर्दियों में अंगीठी अथवा चूल्हे में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
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गुरदेव सिंह चाय व मिठाई की दुकान चलाते हैं

गुरदेव सिंह ने बताया कि गांव व आसपास के गाँवों के अन्य लोग भी उन्हें ऐसी मशीन बनाने की डिमांड कर रहे है. इस मशीन से कई घंटो में होने वाला छल्ली छीलने का काम कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है. गुरदेव सिंह कृषि के साथ-साथ स्वारघाट में चाय व मिठाई की दुकान भी चलाते है.

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First published: November 22, 2019, 7:30 PM IST
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