जेपी नड्डा के गोद लिए गांव दियोली के किसान कोकून के दाम कम मिलने नाराज, लगाए ये आरोप

पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा गोद लिए गए जिला बिलासपुर के दियोली गांव के ग्रामीणों का रेशम विभाग के प्रबंधन से खफा होने का मामला सामने आया है.

Arun Chandel | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 28, 2019, 7:45 AM IST
जेपी नड्डा के गोद लिए गांव दियोली के किसान कोकून के दाम कम मिलने नाराज, लगाए ये आरोप
कोकून उत्पादक किसानों ने रेशम विभाग के संबंधित अधिकारियों पर निजी फर्मों के साथ मिली भगत का आरोप लगाया
Arun Chandel | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 28, 2019, 7:45 AM IST
पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा गोद लिए गए जिला बिलासपुर के दियोली गांव के ग्रामीणों का रेशम विभाग के प्रबंधन से खफा होने का मामला सामने आया है. कोकून उत्पादक किसानों ने रेशम विभाग के संबंधित अधिकारियों पर निजी फर्मों के साथ मिली भगत कर किसानों को कोकून के कम दाम दिलवाने का आरोप लगाया है. दियोली गांव के निवासी किसानों संजीव कुमार, मस्त राम ने बताया कि पिछले साल ए ग्रेड के कोकून का दाम 900 रुपए प्रति किलो था जबकि इस बार मनमर्जी के दाम निर्धारित कर दिए जाने से किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान पहुंचा है. इस बार ए ग्रेड के कोकून को कौड़ियों के दाम पर करीब 700 सौ रूपए प्रति किलो खरीदा गया गया.

रेशम कीट पालन से किसानों का आर्थिक हानि हुई

किसानों का कहना है कि इस बार रेशम कीट पालन से उन्हें आर्थिक हानि हुई है.


बता दें कि कोकून तैयार होने के बाद इस बार करीब चार-पांच माह के उपरांत रेशम विभाग के अधिकारियों ने निजी फर्मों से संपर्क कर कोकून की खरीद करवाई. इस कारण कुछ प्रतिशत कोकून तो रखा-रखा ही खराब हो चुका था. किसानों का कहना है कि इस बार रेशम कीट पालन से उन्हें आर्थिक हानि पहुंची है और यह सरासर अन्याय है.

मालूम हो कि रेशम के कीट लेकर उन्हें कड़े परिश्रम से पालकर कोकून तैयार किया जाता है. इसके प्रति शहतूत की पत्तियों की बहुत आवश्यकता होती है. ये शहतूत की पत्तियां रेशम कीट पालकों को खरीदनी पड़ती है. लेकिन इस बार जिस तरह से रेशम विभाग के अधिकारियों ने पंगु व्यवस्था का परिचय दिया है उसके कारण किसानों को भविष्य में रेशम कीट पालन का कार्य छोड़ने पर विवश होना पड़ेगा. दियोली गांव के ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि कोकून खरीद किसानों को हानि पहुंचाने के प्रति बरती गई अनियमितताओं की जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में किसानों का शोषण न हो सके.

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First published: July 28, 2019, 7:45 AM IST
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