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हरित क्रांति को सफल बनाने वाली गोविंद सागर झील में बढ़ रहा है प्रदूषण

हिमाचल प्रदेश के गोविंद सागर झील के कई घाट गंदगी का पर्याय बन चुके हैं.
हिमाचल प्रदेश के गोविंद सागर झील के कई घाट गंदगी का पर्याय बन चुके हैं.

गोविंद सागर झील में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. अगर समय रहते केंद्र सरकार और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने गोविंद सागर झील की सफाई के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो वह दिन दूर नहीं जब यह दम तोड़ दे.

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बिलासपुर. हिमाचल प्रदेश के गोविंद सागर झील के कई घाट गंदगी का पर्याय बन चुके हैं. यहां लोग जानवरों के शव, कूड़े-कचरे डालकर चले जाते हैं. इसके चलते गोविंद सागर झील (Govind Sagar Lake) में प्रदूषण (Pollution) का स्तर लगातार बढ़ रहा है. अगर समय रहते केंद्र सरकार और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) ने गोविंद सागर झील की सफाई के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो वह दिन दूर नहीं जब यह दम तोड़ दे.

गोविंद सागर झील की लंबाई करीब 90 किलोमीटर है

गौरतलब है कि वर्ष 1960 के दशक में भाखड़ा बांध के निर्माण के उपरांत जलभंडारण के रूप में गोविंद सागर झील अस्तित्व में आई थी. गोविंद सागर झील की लंबाई करीब 90 किलोमीटर है जबकि इसकी चौड़ाई करीब सात किलोमीटर तक है. भाखड़ा बांध से शुरुआती दौर में पंजाब-हरियाणा राज्यों को नहरों से जोड़ कर हरित क्रांति का आगाज हुआ था.




इस झील ने उत्तर भारत को किया रोशन

उत्तरी भारत के अनेक राज्यों की जनता को बिजली की सुविधा मिली थी. पंजाब-हरियाणा सहित अन्य दो राज्यों में भी सिंचाई योजनाओं के अलावा इसे पेयजल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है. इसके अलावा भाखड़ा बांध से जाने वाले पानी को दिल्ली के अलावा राजस्थान तक की बंजर धरती हरी-भरी हुई और वहां फसलें व विभिन्न प्रकार के बगीचे लहलाए.

Govind Sagar-गोविंद सागर झील
यहां लोग जानवरों के शव, कूड़े-कचरे डालकर चले जाते हैं.


एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है गोविंद सागर

विडंबना इस बात की है कि चार राज्यों की प्यास बुझाने वाली भाखड़ा बांध पर एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम गोविंद सागर झील के कई घाट मृत प्राणियों के अलावा कूड़े-कचरे से लबालब भरे पड़े हुए हैं. बिलासपुर वासियों ने केंद्र सरकार व भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से मांग की है कि गोविंद सागर झील में बढ़ रही गंदगी को रोकने के अलावा इसकी सफाई के लिए कोई ठोस सकारात्मक कदम उठाए जाएं.

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