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Himachal: माता-पिता का सपना पूरा करने लिए छोड़ी नौकरी, UPSC में 80वीं रैंक हासिल कर गांव का छोरा बना अफसर

इशांत जसवाल ने यूपीएससी परीक्षा 2020 में 80वीं रैंक हासिल की है.

इशांत जसवाल ने यूपीएससी परीक्षा 2020 में 80वीं रैंक हासिल की है.

UPSC RESULTS 2020: हिमाचल के बिलासपुर के घुमारवीं की ग्राम पंचायत पडयालग के रहने वाले इशांत जसवाल (Ishant Jaswal) ने यूपीएससी परीक्षा (UPSC Civil Services Exam) में देश भर में 80वीं रैक हासिल कर अपना डंका बजवाया है. इसके अलावा इस बार हिमाचल के चार अन्‍य युवाओं ने भी यूपीएससी परीक्षा पास कर अपनो लोहा मनवाया है.

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बिलासपुर. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के घुमारवीं की ग्राम पंचायत पडयालग के रहने वाले पूर्व सैनिक के बेटे इशांत जसवाल (Ishant Jaswal) ने यूपीएससी परीक्षा (UPSC Civil Services Exam) में देश भर में 80वीं रैक हासिल कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है. मजेदार बात ये है कि उन्‍होंने अपने माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी की थी. इसके अलावा सोलन के व्योम बिंदल को 141वीं रैंक, हमीरपुर के अभिषेक धीमान को 374 वीं रैंक, कोलार के उमेश लाबना को 397वीं रैंक और सोलन के बद्दी के रहने वाले विसाल चौधरी को 665वीं रैंक मिली है. इस बार हिमाचल के पांच युवाओं ने अपना दम दिखाया है.

2014-18 बैच के एनआईटी हमीरपुर के मैकेनिकल इंजीनियर इशांत जसवाल के पिता होशियार सिंह पूर्व सैनिक हैं. जबकि उनकी मां अंजना गृहिणी है. इसके अलावा उनकी एक बड़ी बहन है, जोकि शादीशुदा है.

गांव से पढ़ाई करने के बाद यूं शुरू हुआ सफर
इशांत जसवाल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल साथ लगते गांव के प्राथमिक विद्यालय बाड़ी छज्जोली से की है. इसके बाद घुमारवीं के निजी हिम सर्वोदय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 2014 में 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद 2014-2018 में एनआईटी हमीरपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. वहीं, इशांत जसवाल का प्लेसमेंट 2018-19 में दिल्‍ली-एनसीआर की एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी तेल और गैस कंपनी में हुआ था.

इसके बाद अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने के लिए वह नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में कूद पड़े. जबकि इशांत जसवाल ने अपने पहले की प्रयास में 80वीं रैंक हासिल कर अपना डंका बजवाया है. वहीं, जसवाल ने अपनी इस उपलब्धि के लिए अपने माता-पिता को ही प्रेरणास्रोत बताया है, क्‍योंकि उनका सपना था कि मैं देश सेवा करूं.

दिल्‍ली में 9 महीने कोचिंग और फिर…
इशांत जसवाल ने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए मात्र नौ महीने दिल्ली में कोचिंग ली. जबकि वह कोरोना की महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद निरतंर घर में पढ़ते रहे और अपनी कड़ी मेहनत से माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया.

इशांत की मां ने कही ये बात
इंशात की मां अंजना ने कहा, ‘हमारा सपना था कि बेटा प्रशासनिक सेवा में जाए.’ साथ ही कहा कि उसने खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए एक साल तक जॉब की और फिर हमारे सपने के लिए नौकरी छोड़ दी. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि छोटे से गांव से निकल कर बेटे ने प्रदेश का नाम रोशन किया है. वह काफी खुश हैं.

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