हिंदू-मुस्लिम की एकता का प्रतीक चंबा मिजंर मेले का हुआ आगाज

मिंजर मेले की विशेषता है कि लक्ष्मीनारायण मंदिर तथा रघुनाथ जी के मंदिर में चढ़ाई जाने वाली पहली मिंजर को मुस्लिम परिवार तैयार करता है. कश्मीरी मोहल्ला निवासी एजाज मिर्जा ने बताया कि उनके पूर्वज मिर्जा शफी बेग जरी (गोटे) के कुशल कारीगर थे.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 4:59 PM IST
हिंदू-मुस्लिम की एकता का प्रतीक चंबा मिजंर मेले का हुआ आगाज
चंबा का मिंजर मेला 4 अगस्त तक चलेगा.
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Updated: July 29, 2019, 4:59 PM IST
28 जुलाई से चंबा का मिंजर मेला शुरू हो गया है. भगवान रघुवीर और लक्ष्मी नारायण को मिर्जा परिवार द्वारा जरी और गोटे की बनी मिंजर चढ़ाने के साथ ही चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला शुरु हो गया. विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने ने चंबा के ऐतिहासिक चौगान में ध्वजारोहण कर इस मेले का शुरुआत की.

अनेकता में एकता का प्रतीक है चंबा का मिंजर मेला. कहने को तो भाई-बहन के अटूट प्रेम की निशानी भी है, लेकिन मुस्लिम परिवार गोटे से मिंजर तैयार कर भगवान लक्ष्मीनाथ और रघुवीर भगवान को चढ़ाता है. कुल मिला कर मिंजर मेला भाई-बहन के प्यार के साथ-साथ आपसी प्रेम-भाव को भी दर्शाता है.

चंबा की सांस्कृतिक विरासत
श्रावण में उत्तरी भारत में नदी के किनारे अथवा झूलों की बहार में मेले लगते हैं. हिमाचल राज्य के पूर्वोत्तर और हिमालय की पश्चिमोत्तर सीमावर्ती भीतरी तराई में स्थित रावी घाटी प्राकृतिक सौंदर्य से रसा-बसा स्थान है. यहां कबिलयाई मूल का चम्बायाली समुदाय निवास करता है. इस क्षेत्र में आज भी प्रागैतिहासिक कालीन सांस्कृतिक एवं सामाजिक मान्याताओं के दर्शन होते हैं. श्रावण में वर्षा ऋतु में चंबा का मिंजर मेला अति महत्वपूर्ण है. यह चंबा की सांस्कृतिक विरासत में शामिल है. अगले रविवार को मिंजर के रावी में विसर्जन के साथ ही ये मेला समाप्त होगा.

मिंजर का कोई धार्मिक स्वरूप नहीं
कुछ विद्वानों का मत है कि मिंजर का कोई धार्मिक स्वरूप नहीं है, बल्कि मिंजर वरूण देवता को अच्छी वर्षा एवं अच्छी फसल के लिए और रावी अथवा इरावती नदी के उफान को शांत करने के लिए ही नदी में मक्की की मिंजर का निर्माण कर प्रवाहित करते हैं. 4 अगस्त यह मेला खत्म होगा. इसमें मुख्य तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं.

ये है खासियत
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मिंजर मेले की विशेषता है कि लक्ष्मीनारायण मंदिर तथा रघुनाथ जी के मंदिर में चढ़ाई जाने वाली पहली मिंजर को मुस्लिम परिवार तैयार करता है. कश्मीरी मोहल्ला निवासी एजाज मिर्जा ने बताया कि उनके पूर्वज मिर्जा शफी बेग जरी (गोटे) के कुशल कारीगर थे. मिर्जा शफी बैग ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए धान की असली मिंजर का प्रारूप के रूप में जरी और सोने की तारों से आकर्षक मिंजर तैयार कर राजा पृथ्वी सिंह को भेंट की थी. इसे देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुए थे और तब से लेकर आज तक यह पर परम्परा कायम हैं कि इस परिवार की बनाई पहली जरी मिंजर भगवान रघुवीर और लक्ष्मीनारायण को चढ़ाई जाती है.  विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने लोगों को मिंजर मेले की मुबारकबाद देते हुए कहा कि में मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मिंजर मेले की शुरुआत के लिए उन मुख्य अतिथि के तौर पर मौका दिया है.

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First published: July 29, 2019, 3:57 PM IST
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