SPORTS: चंबा के कल्याण सिंह को चैंपियन बनने के लिए लोहे की फैक्ट्री में करनी पड़ी मजदूरी

चंबा जिले के कल्याण सिंह ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित जूनियर कॉमनवेल्थ वेट लिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर लोहा मनवाया है. कल्याण सिंह को इस मुकाम को हासिल करने के लिए लोहे की फैक्ट्री में मजदूरी तक करनी पड़ी.

HEM THAKUR | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 21, 2019, 9:36 AM IST
SPORTS: चंबा के कल्याण सिंह को चैंपियन बनने के लिए लोहे की फैक्ट्री में करनी पड़ी मजदूरी
ऑस्ट्रेलिया के सुमोहा में कल्याण सिंह ने यह मुकाम हासिल किया.
HEM THAKUR | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 21, 2019, 9:36 AM IST
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के कल्याण सिंह ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित जूनियर कॉमनवेल्थ वेट लिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर लोहा मनवाया है. चंबा के भटियात क्षेत्र के तारागढ़ गांव के रहने वाले कल्याण सिंह को इस मुकाम को हासिल करने के लिए लोहे की फैक्ट्री में मजदूरी तक करनी पड़ी. कल्याण सिंह चंबा जिले के भटियात में तारागढ़ गांव में देवराज के घर 20 सितंबर 1999 को पैदा हुए. उनकी मां कौशल्या देवी एक घरेलू महिला हैं.

पढ़ाई में थे ढीले ढाले इसलिए खेल में करना चाहते थे नाम रोशन

kalyan singh-कल्याण सिंह
चंबा जिला मुख्यालय पहुंचने पर चैंपियन कल्याण सिंह का स्थानीय प्रशासन द्वारा जोरदार स्वागत किया गया.


कल्याण सिंह ने बताया कि उन्हें बचपन से ही वेटलिफ्टिंग का शौक था. उन्होंने कहा कि वे पढ़ाई में थोड़े ढीले थे इसीलिए वे चाहते थे कि खेलों में जाकर अपने परिवार व अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें. उन्होंने बताया की हिमाचल में सुविधाएं ना होने की वजह से वह पंजाब में वेटलिफ्टिंग सीखने के लिए चले गए. लेकिन वहां पर काफी महीनों तक मेहनत के बावजूद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पा रहा था. इसके बाद में उन्होंने लुधियाना में एक वेटलिफ्टिंग सेंटर में डीके शर्मा कोच से कोचिंग लेना शुरू किया और वहां उनके कौशल में निखार आया.

खर्च उठाने के लिए की मजदूरी

लुधियाना में वेटलिफ्टिंग कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग के दरमियान उन्हें अपना खर्च उठाने में बहुत दिक्कत आ रही थी. इसी के चलते उन्हें एक लोहे की फैक्ट्री में मजदूरी का काम करना शुरू किया. सुबह पांच बजे उठकर घर का सारा काम करके वह फैक्ट्री में सुबह 8 बजे से शाम 3:00 बजे तक जाते थे और बाद में घर आकर 5:00 बजे तक घर का सारा काम करके फिर वह ट्रेनिंग के लिए अपने कोचिंग सेंटर जाते थे.

मेडल मिला पर आर्थिक तंगी से नहीं मिली छुट्टी
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कल्याण सिंह का यह संघर्ष काफी दिनों तक चलता चलता रहा. कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सबसे पहले हिमाचल ओलंपिक में सिल्वर मेडल हासिल किया और बाद में उन्होंने जिला स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया. इस तरह से उनकी नेशनल लेवल पर काफी पहचान बन गई. उसके बाद उन्होंने अपने घर वालों से बात की क्योंकि उन्हें अपना खर्च उठाने में काफी दिक्कत हो रही है इसीलिए उन्होंने अपनी माता जी को अपने पास बुला लिया. माताजी ने भी एक फैक्ट्री में मजदूरी करना शुरू किया जिससे उनका खर्च चलना शुरू हो गया.

आर्थिक तंगी के बावजूद पिता कल्याण को भेजते थे पैसा

कल्याण सिंह के पिता देवराज मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं उन्होंने बताया कि बचपन से यह कल्याण को खेलों के प्रति काफी रुचि थी. लेकिन उनकी माली हालत सही ना होने की वजह से उन्हें काफी मुश्किल हो रही थी.

मां ने भी की मजदूरी

उन्होंने बताया कि उनका बेटा अपनी मेहनत और लगन से पंजाब वेटलिफ्टिंग सिखने के लिए चला गया था और मैं उसे खर्च भेजता था पर यहां घर पर काफी आर्थिक तंगी रहने लगी. इसके बाद कल्याण जब लुधियाना गया तो वहां पर उसके खर्चे और बढ़ गए जिसकी वजह से उसकी माता को वहां भेजना पड़ा.

कल्याण सरकार से चाहते हैं मदद

इसके बाद कल्याण सिंह का नेशनल लेवल पर काफी नाम हो गया और उन्हें भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि मेरा लक्ष्य 2022 में कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड मेडल व ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करके मेडल हासिल करना है. वह चाहते हैं कि सरकार उनकी आर्थिक सहायता करें ताकि वह और बेहतर प्रदर्शन कर सके.

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First published: July 21, 2019, 9:35 AM IST
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