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    पूर्व सांसद राजन सुशांत का हमला- हिमाचल सरकार केंद्र और राज्य के ब्यूरोक्रेट्स के हाथों की कठपुतली है

    राजन सुशांत ने रोजगार के मसले पर हिमाचल सरकार पर निशाना साधा. (फाइल फोटो)
    राजन सुशांत ने रोजगार के मसले पर हिमाचल सरकार पर निशाना साधा. (फाइल फोटो)

    पूर्व सांसद ने कहा कि एनपीएस (NPS) का मसला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हरेक बच्चे और नौजवान का है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की अपील की.

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    चम्बा. हिमाचल के चंबा-कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद राजन सुशांत (Rajan Sushant) ने कहा कि राज्य में हालात दिन प्रतिदिन दयनीय होते जा रहे हैं. राज्य सरकार (Himachal Government) कभी केंद्र और कभी राज्य के ब्यूरोक्रेट के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है. एनपीएस को लागू करने के लिए आंदोलन का आगाज किया है. इसके तहत सरकार को पुरानी पेंशन योजना को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की है.

    पूर्व सांसद ने कहा कि यह मसला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हरेक बच्चे और नौजवान का है. जिनका भविष्य दांव पर लगा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की अपील की.

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में मनरेगा आया था, जिसमें देशभर के लोगों को दो समय की रोटी के लिए रोजगार का प्रावधान किया गया था. जिसे वर्ष 2006 में देश के 200 अति पिछड़े जिलों में लागू किया गया. हिमाचल के जिला सिरमौर और चंबा  में भी इसे लागू किया गया. बाद में 2008 में देश के शत-प्रतिशत जिलों में इसे लागू कर दिया गया. यह देश के भीतर एकलौती ऐसी योजना है, जिसने कोविड-19 के दौर में भी रोजगार अर्जित किया.



    बतौर पूर्व सांसद प्रदेश में अबतक आंकडों में 13 लाख परिवारों में 25 लाख के करीब मजदूरों ने पंजीकृत करवाया है. इनमें से आठ लाख परिवारों में 12 लाख लोग सक्रिय रोजगार जॉब गारंटी में रोजगार पा रहे हैं. 5 लाख 35 हजार परिवार और लगभग 16 लाख परिवार अत्यंत गरीब है और मनरेगा में दिहाड़ी पर काम कर रहे हैं. सात लाख 16 हजार लोग अब तक इस एक्ट से लाभांवित हुए हैं.
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के समक्ष सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी से निपटना है. लेकिन 13 लाख बेरोजगारों पर सरकार अपने कैबिनेट की बैठक में बंपर रोजगार की घोषणा ऐसे करते हैं, जैसे सौ फीसदी रोजगार के लिए भर्ती निकाली जा रही हो. प्रदेश सरकार को शर्म आनी चाहिए.

    उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि योजनाबद्ध रूप से प्रदेश में हर विभाग, बोर्डों व निगमों में बेरोजगारों को रोजगार देने की योजना तैयार होनी चाहिए. जिसमें जो पद खाली हो रहे हैं, उन पदों पर नियमित तौर पर भर्ती होनी चाहिए. आऊटसोर्स, अनुबंध व सेल्फ रोजगार योजनाओं को बंद कर इन्हें नियमित रोजगार में परिवर्तित किया जाना चाहिए.
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